सुनवाई से पहले ज्ञानवापी मामले में वादी महिलाएं अपने अधिवक्ताओं के साथ जिला जज कोर्ट पहुंचीं थी। ज्ञानवापी-श्रृंगार गौरी मामले में जिला जज की अदालत में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की मांग खारिज होने के बाद पहली बार सुनवाई हुई।
अभी तक क्या-क्या हुआ ?
पिछली सुनवाई में जिला जज ने इस मुकदमे को सुनवाई योग्य करार दिया था, इसके बाद अंजुमन की ओर से आवेदन भी दिया गया है। ऐसे में इन आवेदनों पर सुनवाई के बाद अदालत की ओर से आदेश दिया जा सकता है। जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने 12 सितंबर 2022 को अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की मांग को खारिज करते हुए कहा था कि शृंगार गौरी केस सुनवाई योग्य है।
साथ ही सुनवाई की तिथि गुरुवार 22 सितंबर को तय की थी। आदेश में उन्होंने कहा था कि उस दिन जितने लोगों ने पक्षकार बनने के लिए ऑर्डर 1 रूल 10 के तहत आवेदन दिया था, उस पर सुनवाई होने के साथ शृंगार गौरी मामले में वाद बिंदु भी तय किया जाएगा। संबंधित पक्षकार जवाबदेही भी दाखिल करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए अंजुमन ने अदालत में आवेदन दिया और आदेश की तिथि 12 सितंबर से 8 सप्ताह बाद शृंगार गौरी मामले की सुनवाई की मांग की।
अंजुमन की तरफ से अधिवक्ता रईस अहमद, मेराजुद्दीन सिद्दीकी व मुमताज अहमद ने शृंगार गौरी वाद के सभी 52 बिंदुओं पर जवाबदेही दाखिल की। जिस पर हिंदू पक्ष की तरफ से अधिवक्ता मानबहादुर सिंह ने कड़ा विरोध किया और कहा कि 90 दिनों की मियाद समाप्त होने के बाद यह दाखिल की गई है। ऐसे में देरी के बाबत बिना उचित कारण बताए और शपथपत्र लिए बगैर इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस मामले में उचित कारणों के साथ शपथपत्र दाखिल करने को कहा है।