ज्ञानवापी परिसर स्थित ब्यास जी के तहखाने को अंजुमन इंतजामिया मस्जिद पर कब्जा कर लेने का अंदेशा जताते हुए शिकायतकर्ता शैलेंद्र पाठक ने एक याचिका दायर की थी। जिस पर पक्षकार बनने के लिए लॉर्ड स्वयंभू काशी विश्वेश्वर मूल वाद के वादमित्र विजय शंकर रस्तोगी ने कोर्ट में कड़ी आपत्ति जताई है।
उन्होंने कहा कि वादी के कार्य से प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लॉर्ड विश्वेश्वर के हित एवं अधिकार, साधारण हिंदू आस्थावन के हक व अधिकार पर कुठाराघात करने की चेष्ठा है, जिसको बचाने के लिए स्वयंभू लॉर्ड विश्वेश्वर के वादमित्र होने के कारण पक्षकार बनाया जाना आवश्यक है।
इसके पहले भी शैलेंद्र पाठक व उनके भाई जैनेन्द्र का आवेदन खारिज हो चुका है। प्रकरण में वादी ने ज्ञानवापी परिसर के प्लाट नंबर 9130 में व्यक्तिगत हैसियत और हक व अधिकार पुजारी के रूप में बताते हुए दर्शन पूजन के अधिकार के लिए दिए गए आवेदन में तहखाने का कब्जा डीएम को बतौर रिसीवर दिए जाने का अनुरोध किया गया है।
आपत्ति में यह भी कहा गया कि आठ जुलाई 2016 को ही शैलेन्द्र पाठक और उनके भाई ने ज्ञानवापी परिसर का हक व अधिकार काशी विश्वनाथ मंदिर के उप कार्यपालक अधिकारी को दिए जाने का पंजीकृत डीड हुआ है। ऐसे में इन्हें वाद दाखिल करने का अधिकार भी नहीं है। कहा कि वर्ष 2019 में अंजुमन इंतजामिया, सुन्नी वक्फ बोर्ड की आपत्ति के बाद आवेदन ख़ारिज हो चुका है। इसके बावजूद झूठा शपथपत्र देकर वाद दाखिल किये जाने का आरोप लगाया कहा कि इससे आपराधिक वाद बनता है।
वादी की तरफ से अधिवक्ता सुधीर त्रिपाठी व सुभाष नंदन चतुर्वेदी ने दलील मे कहा कि इन्हें पक्षकार बनने का अधिकार ही नहीं विपक्षी से मिलकर वादी को अधिकार से रोकने का प्रयास बताया। जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश ने सभी पक्ष की दलील सुनने के बाद पक्षकार बनने के आवेदन के निस्तारण के लिए आठ दिसंबर की तिथि नियत कर दी।