काशी में मेट्रो रेल की जगह लाइट मेट्रो चलाने की योजना बनाई जा रही है। मेट्रो की तुलना में शहर की भौतिक स्थिति लाइट मेट्रो के लिए अधिक उपयुक्त है। इस कारण ऐसा किया जा रहा है।
इसके लिए रेलवे मंत्रालय की तकनीकी संस्था राइट्स की टीम ने मंगलवार को यहां वीडीए सभागार में अपना प्रजेंटेशन दिया। कमिश्नर ने प्रजेंटेशन देखने के बाद लाइट मेट्रो के साथ ही शहर में वाटर बेस्ड प्लान तैयार करने का सुझाव दिया। अब जल्द ही राइट्स वाटर बेस्ड प्लान भी तैयार करेगी।
शहर में राइट्स की तीन सदस्यीय टीम ने पहली बार मेट्रो रेल परियोजना के लिए जो फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार की थी, उसमें बीएचयू से भेल तक और बेनियाबाग से सारनाथ तक दो रूट निर्धारित किए थे।
28 किमी लंबे इन रूटों पर करीब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन बाद में विशेषज्ञों की सलाह पर इसे खारिज करते हुए वीडीए ने राइट्स को दोबारा प्लान बनाने की जिम्मेदारी सौंपी।
इसके लिए वीडीए ने करीब 81 लाख रुपये भी राइट्स को दिए। इसके बाद राइटस ने दोबारा सर्वे किया और यहां की फिजिबिलिटी रिपोर्ट के आधार पर मेट्रो की जगह लाइट मेट्रो का प्लान तैयार कर उसका प्रजेंटेशन किया।