उत्तराखंड में ऋषिकेश की तर्ज पर बनने वाला लक्ष्मण झूला का प्रस्ताव शासन ने खारिज कर दिया है। गंगा के अर्द्धचंद्राकार छवि में बाधा बनने के कारण पीएमओ और शासन ने झूले को प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। अधिकारियों की मानें तो रामनगर में बंदरगाह बनने से यहां नियमित रूप से जलपोत व क्रूज का परिवहन जारी रहेगा, वहीं मालवाहक जलपोत के आवागमन में झूला बाधक बन सकता था।
मणिकर्णिका व ललिता घाट के बीच गंगा की ओर से भी कॉरिडोर होते हुए विश्वनाथ मंदिर में प्रवेश के लिए एक भव्य द्वार तैयार हो रहा है। वहीं जिला व मंदिर प्रशासन ने गंगा किनारे से लोगों के प्रवेश को लेकर दो वर्ष पहले लक्ष्मण झूला का प्रोजेक्ट तैयार कराया था। ऋषिकेश की तर्ज पर गंगापार पड़ाव से काशी विश्वनाथ धाम तक करीब दो किलोमीटर लंबाई में झूला निर्माण की योजना थी। पीएमओ और शासन ने गंगा की अर्द्धचंद्राकार छवि में बाधा बनते देख इसे खारिज कर दिया है। इस प्रोजेक्ट के पीछे प्रशासन की मंशा थी कि गंगापार से आने वाले लोगों को मंदिर तक पहुंचने के लिए शहर के अंदर से बहुत घूमना नहीं होगा। साथ ही, झूला बनने से शहर में जाम का दबाव होगा। इसलिए गंगापार पड़ाव में अवधूत भगवान राम घाट के पास से कॉरिडोर के बीच लक्ष्मण झूला की तरह पाथ-वे बनाने का विचार आया। अवधूत घाट के पास एक बड़ा पार्किंग स्थल भी प्रस्तावित किया गया था। पार्किंग में वाहन खड़ा करने के बाद श्रद्धालु पैदल ही कॉरिडोर में पहुंचते।
कोट
पड़ाव से कॉरिडोर के बीच में लक्ष्मण झूला के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया है। शासन ने इसको अनुमति नहीं दी है। इससे काशी के घाटों की सुंदरता प्रभावित हो रही थी।
- डॉ. सुनील कुमार वर्मा, सीईओ विश्वनाथ मंदिर न्यास