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विमान हादसा : सूरज की अंतिम बिदाई पर पत्नी ने किया सैल्यूट, पिता बोले- बेटे का सपना पूरा करेंगे

Fri, 21 Jun 2019 11:14 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बलिया
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पति सूरज की अंतिम विदाई पर सैल्यूट करती पत्नी शालू। - फोटो : अमर उजाला
असम के जोरहाट एयरफोर्स सेंटर के विमान हादसे में जान गंवाने वाले सूरज कुमार के अंतिम दर्शन के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। सभी ने नम आंखों से विदाई दी। पति सूरज सिंह को खो देने के गम में बिलख रही पत्नी शालू सिंह में राष्ट्र को लेकर जज्बा भी दिखा। उन्होंने सूरज के सैल्यूट देकर अंतिम विदाई दी। शहीद सूरज सिंह की पत्नी शालू सिंह ताबूत पर सर रखकर रो रही थीं। उनका सबकुछ लुट चुका था। तीन माह पूर्व 19 फरवरी को ही उसकी शादी सूरज के साथ हुई थी। शालू ने कहा कि इतने कम समय में सूरज मुझे छोड़कर चले गए। शालू ताबूत खोलकर अपने पति के शव को एक बार देखना चाहती थी लेकिन उसकी इच्छा पूरी नही हुई।
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पौत्र सूरज सिंह का पार्थिव शरीर को देखते ही दादी हीरामोती देवी रोने लगी। वह पौत्र के पार्थिव शरीर को निहारती और फफक कर रोती रही। रोते हुए बोल रही थी कि जन्म से लेकर 19 वर्षों तक लाडले पोते को अधिकारी बनाने के लिए संघर्ष करती रही। इसके लिए परिवार से दूर जिला मुख्यालय पर रहकर सूरज को पढ़ाया लेकिन मेरा बेटे विनोद सिंह ने सूरज को सेना में जाने के लिए प्रेरित किया। इसके चलते सूरज ने 20 वर्ष की अवस्था में एयरफोर्स में भर्ती हुआ। दादी रोते हुए कहती रहीं अब तक सूरज के सपनों में खोकर मेरा बुढ़ापा कटता रहा लेकिन अब बुढ़ापा कैसे कटेगा।
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पिता विनोद सिंह को अपने पुत्र सूरज पर गर्व है। वह शुरू से ही कहा करते थे कि सूरज सेना में जाकर उनका ही नहीं देश का नाम रोशन करेगा। जब सूरज वायु सेना में भर्ती हुए थे तो पिता विनोद सिंह खुशी से झूम उठे थे। उन्होंने उस समय सूरज से कहा था बेटा देश की रक्षा करना और हमारा नाम रौशन करना। उन्हें क्या पता था कि उनका बेटा सेना की नौकरी पूरी नहीं कर पाएगा। आखिरकार सूरज ने जान गवांकर पिता और जिले का रौशन कर हमेशा के लिए साथ छोड़ जाएगा। शहीद के पिता विनोद सिंह ने कहा कि मेरा बेटा अपने दोनों भाइयों को भी सेना में जाने के लिए प्रेरित करता था। सूरज का सपना साकार करने के लिए अन्य दो बेटों विक्रांत और प्रिंस को भी सेना में भेजने के लिए प्रेरित करेंगे।

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विमान हादसे में शहीद सूरज की माता पूनम सिंह बिलखते हुए कह रही थी कि काश मेरे कलेजे के का टुकड़ा सूरज 15 दिनों की जगह एक माह का छुट्टी लेकर आया होता तो मेरा बेटा आज मेरे सामने होता। छुट्टी बिताकर जाते वक्त सूरज ने कहा था कि अबकी एक महीना की छुट्टी लेके घर आएंगे। तब पापा को दिल्ली इलाज करवाने लेकर जाएंगे। पर सूरज अपना वादा पूरा नहीं कर सका। घर आया तो हमारा सूरज ताबूत में रखके आया और तिरंगे से लिपटकर आया। हम सपने में भी यह नहीं सोच सकते थे। हमारा बेटा जैसे बिछड़ा वैसे किसी और का बेटा उससे कभी ना बिछड़े। माता के साथ ही दादी हिरामोती देवी छाती पीटकर रो रही थी।
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तीन जून 2019 को असम के जोरहाट सेंटर से उड़ान भरने के बाद वायुसेना का एएन 32 विमान अरुणांचल प्रदेश के लोपो गांव के समीप दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। हादसे में विमान में मौजूद 13 सैन्यकर्मियों की मौत हो गई। उस समय सिर्फ विमान लापता होने की खबर थी जिससे परिजन अपने लाल के लौटने की उम्मीद थे। 9 जून को विमान का मलवा दिखाई दिया जिसकी सूचना पर परिजनों धड़कने तेज होने लगी। आशंकाओं को लेकर लोग दुखी हो गए थे। जोरहाट सेंटर के एयरफोर्स के कमांडिंग अफसर ने 11 जून को स्पष्ट कर दिया कि विमान में सवार 13 जवानों की विमान हादसे में मौत हो चुकी है।
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