संकट मोचन संगीत समारोह की अंतिम निशा में प्रख्यात नर्तक केलुचरण महापात्र के योग्य शिष्य व पुत्र रतिकांत महापात्र ने रामायण के प्रसंगों को मंच पर सजीव किया। ओडिसी की अद्भुत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
सोमवार को कार्यक्रम की शुरुआत राग अहीर भैरव में विलंबित तीन ताल में गणपति वंदना से हुई। ओम गं गणपत नमो नम: रचना पर राजश्री, ऐश्वर्या और रितु सेनगुप्ता ने प्रभावी भंगिमाओं के माध्यम से ओडिसी की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से दर्शकों को मोह लिया।
अगली कड़ी में रतिकांत महापात्रा ने शबरी के प्रसंग से दर्शकों के दिलों को भी छू लिया। अभिनय प्रधान ओडिसी नृत्य ने मंच पर जहां शबरी की पीड़ा को जीवंत किया और राम का भक्तों के प्रति अनुराग भी दर्शाया।
शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप के महत्व को दर्शाती अगली प्रस्तुति को भी दर्शकों ने हर-हर महादेव के जयघोष से अपनी स्वीकार्यता की मुहर लगाई। शबरी और अर्धनारीश्वर का प्रसंग मल्लिका ताल और राग में पिरोया हुआ था। कार्यक्रम का समापन जटायु वध से किया गया। इस मार्मिक प्रस्तुति को रतिकांत और राजश्री ने ओडिसी की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से जीवंत किया।