महाशिवरात्रि पर भक्तों ने संगीत की रसधार से बाबा का अभिषेक किया। कला साधकों ने गंगा के तट और ध्रुपद तीर्थ से संगीत की ऐसी त्रिवेणी प्रवाहित की। इससे बाबा भोलेनाथ भी मगन हो उठे। वहीं, काशी नरेश परिवार के अनंत नारायण सिंह ने इस वर्ष के वरिष्ठ व युवा कलाकारों की घोषणा की। कहा, सभी कलाकारों की प्रस्तुतियों को संरक्षित की जाएगी।
यह मौका महाराज बनारस विद्या मंदिर न्यास व ध्रुपद समिति की ओर से तुलसी घाट पर चल रहे महाशिवरात्रि को समर्पित पांच दिवसीय 51वें अंतरराष्ट्रीय ध्रुपद मेले की अंतिम निशा का था। मुंबई के कलाकार सुखद मुंडे स्वतंत्रत पखावज वादन से शुरुआत हुई। उन्होंने वादन में अपने पिता व गुरु पं. माणिक मुंडे जी की शैली से शिव को नमन किया।
सारंगी पर गौरी बनर्जी सती ने संगत की। डेविड अल कबीर रुद्रवीणा बजाकर राग देस में आलापचारी और चौताल में निबद्ध ध्रुपद रचना को विस्तार दिया। दिल्ली के पं. डालचंद्र शर्मा ने पखावज पर चौताल में वादन के साथ फरमाइशी चक्करदार, तिहाइयां बजाईं।
वरिष्ठ गायक उस्ताद वासिफउद्दीन डागर, पं. प्रेम कुमार मलिक, डॉ. संतोष दास अनुरागी पखावज, राजेश सेंढ, संतोष कुमार, शिशिर कर्मकार गायन, पं. रवींद्र नारायण गोस्वामी सुरबहार की भी प्रस्तुतियां हुईं।
पं. डालचंद शर्मा को लाइफटाइम पुरस्कार
इसमें वरिष्ठ एवं युवा कलाकारों को पुरस्कृत हुए। अनंत नारायण सिंह, ध्रुपद मेला के संयोजक व श्रीसंकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्रा एवं मेले के संस्थापक सदस्य संगीतज्ञ डॉ. राजेश्वर आचार्य ने भी उन्हें सम्मानित किया।
महाराज बनारस विद्या मंदिर न्यास ने वरिष्ठ पखावज वादक पं. डालचंद शर्मा को लाइफटाइम पुरस्कार, पखावज के युवा कलाकार सुखद मुंडे को डॉ. विभूति नारायण सिंह पुरस्कार, स्वाति तिरुनाल पुरस्कार विचित्र वीणा वादन वाराणसी के डॉ. संजय वर्मा, गायन में मलिक बंधु प्रशांत मलिक एवं निशांत मलिक को संयुक्त रूप से दिया।