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ललितेशपति त्रिपाठी का कांग्रेस से इस्तीफा: सौ सालों का नाता चौथी पीढ़ी तक पहुंचकर खत्म, प्रियंका गांधी के पूर्वांचल दौरे से ठीक पहले छोड़ी पार्टी

Fri, 24 Sep 2021 01:07 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

उत्तर प्रदेश में त्रिपाठी परिवार को कांग्रेस का पहला परिवार कहा जाता था। ललितेशपति त्रिपाठी के इस्तीफे के बाद कांग्रेस और औरंगाबाद हाउस का चार पीढ़ियों का नाता टूट गया है।
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ललितेशपति त्रिपाठी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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ललितेशपति ने दिल में और संस्कारों में कांग्रेस के बसने की बात तो कही लेकिन घर छोड़ने का ऐलान भी कर दिया। पूर्व सीएम पं. कमलापति त्रिपाठी के परिवार से कांग्रेस का सौ सालों का नाता चौथी पीढ़ी तक पहुंचकर समाप्त हो गया। प्रियंका गांधी के पूर्वांचल दौरे से पहले ललितेश त्रिपाठी का कांग्रेस छोड़ने का फैसला पूर्वांचल में कांग्रेस को प्रभावित करेगा। 

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पंडित कमलापति त्रिपाठी के परिवार से ललितेश पहले व्यक्ति हैं, जिन्होंने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया है। पं. कमलापति त्रिपाठी ने तमाम उपेक्षाओं के बावजूद जीवनपर्यंत कांग्रेस का साथ नहीं छोड़ा। उनके अलावा लोकपति त्रिपाठी और राजेशपति त्रिपाठी भी पार्टी के प्रति निष्ठावान रहे। ऐसे में ललितेशपति का पार्टी से मोहभंग निसंदेह बड़ी राजनीतिक घटना है। 2022 विधानसभा चुनाव में क्या होगा, ये भविष्य के गर्भ में है पर चुनावी सिलसिले से ललितेशपति का यह फैसला बड़ा है।

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कई और भी नेता दे सकते हैं इस्तीफा
जितिन प्रसाद के बाद प्रदेश में दूसरे ब्राह्मण नेता ललितेश का जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि ललितेश के पार्टी छोड़ने के फैसले के बाद और भी कई नेता पार्टी से इस्तीफा दे सकते हैं। वहीं स्थानीय कांग्रेसी नेता भी इस मामले में कुछ कहने से बच रहे हैं। कांग्रेस नेताओं ने पार्टी में मची हलचल पर फिलहाल अपनी जबान बंद रखने में ही भलाई समझी है।

पं. कमलापति त्रिपाठी को प्रधानमंत्री बनाने वाली थीं इंदिरा गांधी

दिवंगत पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपनी किताब इमरजेंसी-रीटोल्ड में लिखा है कि इंदिरा गांधी ने कमलापति त्रिपाठी को जरूरत पड़ने पर अंतरिम पीएम बनाने की पेशकश की थी। इंदिरा ने उन्हें यूपी से केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया था। इमरजेंसी लगाने के फै सले से पहले इंदिरा गांधी कांग्रेस के भीतर विरोध झेल रही थीं। चंद्रशेखर, मोहन धारिया, जगजीवन राम की इच्छा थी कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद इंदिरा इस्तीफा दे दें।

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इंदिरा गांधी ने पार्टी के भीतर समर्थन के लिए संजय गांधी की मदद ली। इसी बीच इंदिरा के पसंदीदा अधिकारी पीएन हक्सर ने एक चिट्ठी बनाई। इसमें इंदिरा को बेशर्त समर्थन देने की बात कही गई। देश भर के सीएम और नेताओं को इस पर दस्तखत करने को कहा गया। संजय गांधी हस्ताक्षर करने वालों का अपडेट मां को लगातार दे रहे थे। इंदिरा ने प्रस्ताव दिया कि इस्तीफा देने की स्थिति में अंतरिम प्रधानमंत्री को नामित करने का अधिकार उन्हें ही मिलना चाहिए।
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जगजीवन राम और यशवंत राव चव्हाण ने इसका विरोध किया। इंदिरा गांधी ने कमलापति त्रिपाठी को जरूरत पड़ने पर अंतरिम पीएम बनाने की पेशकश की। ये जानकर जगजीवन राम रुष्ट हो गए। उन्होंने अपने एक साथी से कहा- ठीक है समर्थन कर देंगे उनका लेकिन इसी शर्त पर कि वो इंदिरा को दोबारा कुर्सी नहीं सौंपेंगे। हालांकि इसकी नौबत ही नहीं आई। इंदिरा ने पीएम रहते हुए आपातकाल घोषित कर दिया।

चुनाव हारने के बाद ही अलग-थलग से पड़ गए थे ललितेश
प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर ताजपोशी का सपना संजोएं पूर्व मुख्यमंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी के प्रपौत्र ललितेश चुनाव हारने के बाद ही अलग-थलग से पड़ गए थे। पार्टी ने प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी तो सौंपी लेकिन शायद यह उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा के अनुरूप नहीं था। नक्सली क्षेत्र होने के बावजूद ललितेश ने मड़िहान से 2012 में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी। युवाओं के चहेते और पूर्वांचल में बड़ा चेहरा होने के बावजूद पार्टी की ओर से ललितेश को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था।

गांधी परिवार से राजनीतिक ही नहीं पारिवारिक हैं रिश्ते
पं. कमलापति त्रिपाठी के परिवार से गांधी परिवार का राजनीतिक ही नहीं पारिवारिक रिश्ता भी जुड़ा हुआ है। इंदिरा, राजीव और सोनिया गांधी के सबसे करीबी पं. कमलापति का घराना रहा है। तमाम विरोधों के बावजूद चाहे इंदिरा गांधी रही हों या राजीव गांधी अथवा सोनिया गांधी तीनों के कार्यकाल में न कभी पं. कमलापति को नकारा गया न लोकपति त्रिपाठी को न राजेश पति त्रिपाठी को। इंदिरा गांधी ने तो पं. कमलापति त्रिपाठी को कार्यकारी अध्यक्ष तक बनाया। राजीव गांधी के खिलाफ पंडित जी ने कई बार खुले पत्र जारी किए। बावजूद इसके इस परिवार को किसी ने कभी नकारा नहीं। अब कांग्रेस में चौथी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रहे पूर्व विधायक ललितेशपति त्रिपाठी ने कांग्रेस से किनारा कर लिया है। 
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