अखबार के जरिये पता चला शुरू हो गई धर पकड़
विद्रोह के लिए जो योजना निर्धारित थी, उसे देखने जानने के लिए सान्यालजी मोटर साइकिल से बनारस कैंटोनमेंट पर शाम के समय पहुंचे। उन्होंने अखबार खरीदा तो मालूम चला कि लाहौर में धरपकड़ शुरू हो गई है। यूरोपियन फौज शहर में पिकेट कर रही है। वे समझ गए कि कुछ गड़बड़ हो गई है। वे तुरंत लौट आए। अजीब स्थिति थी, चेहरा मुरझाया हुआ और मन अशांत। दरअसल एक गद्दार ने सब गड़बड़ कर दिया था।
विप्लव दल में भर्ती कृपाल ने किया था भंडाफोड़
पंजाब पुलिस के खुफिया विभाग के एक मुसलमान डिप्टी सुपरिटेंडेंट ने कृपाल सिंह नाम के सिख को विप्लव दल में भर्ती करा दिया था। इसी एक व्यक्ति ने सारा भंडाफोड़ कर दिया। गदर की निश्चित तिथि 21 फरवरी आने से पूर्व ही गिरफ्तारियां शुरू हो गईं। आखिरकार विप्लव असफल हो गया। बनारस में पिंगले को एक गद्दार ने बमों सहित छावनी में ले जाकर पकड़वा दिया।
रासबिहारी ने छोड़ा देश, सान्याल हुए गिरफ्तार
रासबिहारी बोस ने अप्रैल 1915 में देश छोड़ दिया। शचींद्र नाथ सान्याल 26 जून 1915 को गिरफ्तार कर लिए गए। कुछ दिन बनारस जेल में रखने के बाद उन्हें काला पानी भेज दिया गया। लाहौर षड्यंत्र और बनारस षड्यंत्र के नाम से क्रांतिकारियों पर मुकदमा चला। बहुतों को फांसी दी गई और स्वतंत्रता संग्राम का दूसरा प्रयास असफल रह गया अन्यथा भारत 21 फरवरी 1915 को ही आजाद हो गया होता।