एसटीएफ ने न्यू साकेत नगर कॉलोनी संकटमोचन निवासी मनीष रस्तोगी से पूछताछ की और बताया कि गिरफ्तार आरोपी की संलिप्तता सामने आई है। पता चला कि प्रति अभ्यर्थी के हिसाब से एप्टेक कंपनी के सिटी हेड को एक लाख रुपये मिलते थे। कुछ महीने पहले मास्टरमाइंड हरियाणा के पलवल निवासी चितरंजन शर्मा ने मनीष से संपर्क किया था। शिक्षक भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी के लिए उसे तैयार किया था। प्रति अभ्यर्थी एक लाख रुपये देने का ऑफर दिया था। परीक्षा केंद्रों पर तैनात आईटी टेक्नीशियन को प्रति अभ्यर्थी 20 हजार रुपये दिए जाने का भरोसा दिलाया गया था।
इसे मनीष ने स्वीकार भी किया और एसटीएफ को बताया कि चितरंजन के कहने पर ही अभ्यर्थियों के लिए शिवपुर, चौबेपुर और चितईपुर क्षेत्र के तीन परीक्षा केंद्रों के कंप्यूटर को हैक कराए गए, फिर इसे प्रयागराज में बैठे सॉल्वरों के हवाले किया गया। जब चितरंजन सहित अन्य लोगों की गिरफ्तारी की सूचना मिली तो रविवार को वह वाराणसी से भागने की फिराक में था, लेकिन एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
पेपर सॉल्व कराने के आरोपी
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गिरफ्तार चितरंजन शर्मा गिरोह के लोढ़ान निवासी सोनू यादव, भवानीपुर के अवधेश यादव, जौनपुर के महिमापुर गांव के रमाशंकर यादव और औरैया के डीपारा बेला निवासी ओमकांत शाक्य की तलाश अभी जारी है। जल्द ही इन चारों पर इनाम घोषित किया जाएगा। सभी आरोपियों के खिलाफ वाराणसी कमिश्नरेट की चितईपुर, चौबेपुर और शिवपुर थाने की पुलिस गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई भी करेगी।
एसटीएफ के एडिशनल एसपी के मुताबिक, मनीष परीक्षा केंद्रों के संचालकों को धमकाता था। कहता था कि उनके सेंटर पर गड़बड़ी हो रही है, वह उन्हें फंसा देगा। इससे परीक्षा केंद्रों के प्रबंधक उसकी बात मानने को तैयार हो जाते थे। वह सॉल्वर गिरोह की मदद मनमाफिक तरीके से करता था। उधर, चितरंजन ने बताया कि कोरोना की पहली लहर के बाद फर्जीवाड़ा करने लगा। इसके लिए पूर्वांचल के जिले मुफीद लगे। इस वजह से गिरोह का नेटवर्क पूर्वांचल में खड़ा कर दिया।
मास्टरमाइंड चितरंजन शर्मा वर्ष 2020 से अब तक कई ऑनलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं में सेंधमारी कर चुका है। इसकी तस्दीक एसटीएफ ने भी की है। चितरंजन कंप्यूटर सिस्टम हैक करके धांधली करता था। इससे पहले कभी गिरफ्तार नहीं हुआ था।
केंद्रीय विद्यालय के प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती परीक्षा में धांधली का प्रयास उजागर होने के बाद एक गंभीर सवाल खड़ा हुआ है। पुलिस अफसरों का कहना है कि आखिर प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन की जिम्मेदारी प्राइवेट कंपनियों को क्यों दी जाती है। जबकि, उनका ऑपरेटिंग सिस्टम ऐसा होता है कि उसमें हैकर आसानी से सेंध लगा सकते हैं। एसटीएफ के अनुसार एप्टेक कंपनी प्रतियोगी परीक्षाएं विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम पर आयोजित कराती है। इसमें रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर डालना या इंस्टॉल करना आसान होता है।