गोस्वामी तुलसीदास की कर्मस्थली पर शुक्रवार की शाम को सूरदास के पद गूंज उठे। मुख पर माखन लिपटाए कन्हैया का मनमोहक स्वरूप लीला प्रेमियों के हृदय को आनंद से भर गया। श्रीकृष्ण लीला के दूसरे दिन नामकरण, चंद्र प्रस्ताव, ब्राह्मण भोजन और माखनचोरी की लीला संपन्न हुई।
श्रीकृष्ण लीला का शुभारंभ भगवान के स्वरूपों की आरती उतारकर हुआ। भगवान कृष्ण के नामकरण लीला का साक्षी बनकर काशीवासियों ने हर-हर महादेव का जयघोष किया। मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो... की धुन गूंजी तो लीला प्रेमियों ने भी अपने सुर से सुर मिलाए। लीला के स्वरूपों की आरती महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने उतारी। 18 नवंबर को नागनथैया की लीला संपन्न होगी। श्रीकृष्ण लीला का समापन एक दिसंबर को उग्रसेन राज्याभिषेक और कुबरीगृह शयन से होगा।