संपूर्णानंद संस्कृत विवि में मंगलवार को बुद्ध पूर्णिमा: भारतीय ज्ञान-धारा के शाश्वत प्रकाश का महोत्सव मनाया गया। कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि भारतीय मनीषा में ज्ञान का अर्थ केवल बुद्धिमता नहीं, बल्कि जीवन के दुखों के निवारण का उपाय है। इसी सत्य का साक्षात्कार गौतम बुद्ध ने अपने आत्मानुभव से किया और उसे ‘धम्म’ के रूप में विश्व को दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन का मूल स्वरूप दुखमय है लेकिन यह दुख अनिवार्य नहीं-उसका कारण है और उसका निवारण भी संभव है। यह बोध भारतीय ज्ञान परंपरा की उस व्यावहारिकता को बताता है जो केवल सिद्धांतों में नहीं, बल्कि जीवन-परिवर्तन में विश्वास रखती है।
कुलपति प्रो. शर्मा ने कहा कि बुद्ध का उपदेश भारतीय ज्ञान परंपरा के सातत्य और नवोन्मेष का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने वैदिक परंपरा के दार्शनिक तत्वों-कर्म, पुनर्जन्म और मोक्ष-को स्वीकार करते हुए उन्हें सरल, सुगम और सर्वसुलभ रूप प्रदान किया।