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कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय: साल भर में 15 फीसदी बजट भी नहीं हुआ खर्च

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कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में सरकार की ओर से जारी बजट का 15 फीसदी हिस्सा भी खर्च नहीं हो पाया है। बेसिक शिक्षा विभाग की लापरवाही और अनदेखी मानते हुए शासन ने रिपोर्ट तलब की है। वाराणसी समेत प्रदेश भर के अन्य 48 जिले इसे लेकर आला अधिकारियों के रडार पर हैं।
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राज्य परियोजना निदेशक की ओर से हाल में ही केजीबीवी में जारी हुए बजट और खर्च की सूची जारी की गई है। इसके तहत प्रतापगढ़ और बलराम ही केवल 50 फीसदी लक्ष्य तक पहुंच सके हैं। इन दो जिलों को छोड़कर प्रदेश के 48 जिलों सरकारी योजनाओं को ठीक से लागू नहीं कर पा रहे हैं। वाराणसी जिले में कुल 6 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय हैं। इसमें नामांकित 600 छात्राओं के लिए आवर्तक और अनावर्तक मद में लगभग 16 लाख 428 हजार का लिमिट जारी हुआ था। प्रबंध पोर्टल पर दर्ज ब्योरे के अनुसार जिले में मात्र तीन लाख 19 हजार रुपये ही खर्च हो पाए हैं। साल भर में विभाग ने 1.94 फीसदी राशि ही खर्च की है। परियोजना निदेशक की ओर से जारी सूची में आंबेडकरनगर, बदायूं, बागपत, बांदा, बाराबंकी, देवरिया, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गाजीपुर, गोरखपुर, हाथरस, अमरोहा, कानपुर देहात, कौशांबी, महाराजगंज, महोबा, मैनपुरी, मुरादाबाद, मुजफरनगर, हापुड़, रायबरेली में व्यय की स्थिति शून्य है।
होगी समीक्षा
परियोजना अधिकारी की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार सभी जिलों को अपने यहां कम बजट खर्च को लेकर समीक्षा करनी होगी। छात्राओं को योजनाओं के पूर्ण लाभ का जमीनी निरीक्षण भी करना होगा।
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इन मदों में होता है खर्च
केजीबीवी में छात्राओं के लिए मानदेय व अन्य गतिविधियों के लिए बजट दिया जाता है। वहीं बाउंड्री वाल, रिपेयर, बेडिंग रिप्लेसमेंट, गार्ड रूम आदि के लिए धनराशि दी जाती है। छात्राओं के अध्यापन के साथ आवास, भोजन, दैनिक उपभोग की वस्तुएं, शिक्षण सामग्री, चिकित्सा आदि सभी सुविधाएं भी यहां निशुल्क प्रदान की जाती है।
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