महंत परिवार द्वारा पहले से भेजा गया झूला गर्भगृह पर सजाया जा चुका था। बाबा की पंचबदन चलप्रतिमा को झूले पर विराजमान कराने के बाद पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी ने दीक्षित मंत्र से गर्भगृह में बाबा की चल प्रतिमा का पूजन किया। झूले का बंधन हिला कर बाबा को झूला झुलाया। इसके उपरांत सप्तर्षि आरती के अर्चकों ने क्रमश: बाबा को सपरिवार झूला झुलाया। देर रात तक शिवभक्तों ने बाबा का सपरिवार झांकी दर्शन किया।