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काशी विश्वनाथ के दर्शन के लिए के लिए अब नहीं लगानी होगी लंबी कतार

Sun, 08 Jul 2018 12:26 PM IST
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी विश्वनाथ मंदिर में अब बाबा के दर्शन के लिए अब श्रद्धालुओं को अप्वाइंटमेंट लेना होगा। जी हां, श्री काशी विश्वनाथ मंदिर को डिजिटल किया जा रहा है। विश्वनाथ मंदिर में स्मार्ट प्लेटफार्म के तहत दर्शन के लिए क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जा रहा है।
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सावन से पहले लागू होने जा रही नई व्यवस्था में बाबा के दर्शन के लिए समय निर्धारित किया जाएगा और श्रद्धालुओं को लंबी कतार लगाने से मुक्ति मिलेगी। बाबा के दर्शन के लिए प्रतिदिन 30 हजार से अधिक श्रद्धालु आते हैं, जबकि सावन में यह संख्या डेढ़-दो लाख तक पहुंच जाती है।

बाबा दरबार में दर्शन के लिए क्यू मैनेजमेंट सिस्टम से दर्शन के लिए 25 काउंटर खोले जाएंगे। मंदिर परिक्षेत्र में 15 और शहर के विभिन्न स्थानों पर 10 काउंटर होंगे। इन काउंटर से दर्शनार्थियों को इलेक्ट्रानिक बेस्ड हैंड बैंड डिवाइस दिया जाएगा।
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हैंड बेस्ड डिवाइस में श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन के लिए समय पहले से ही निर्धारित होगा। काउंटर पर लगे डिस्प्ले बोर्ड से दर्शनार्थियों को पता चल जाएगा कि उनका नंबर कब आएगा। हैंडबैंड डिवाइस के बार कोड के आधार पर श्रद्धालुओं को प्रवेश मिलेगा। 

होल्डिंग एरिया में अपनी बारी का करें प्रतीक्षा

काशी विश्वनाथ के जलाभिषेक आैर दर्शन-पूजन के लिए लगी कतार
काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह का कहना है कि हर 10 श्रद्धालु पर एक सेवादार नियुक्त होगा, जो श्रद्धालुओं को गर्भगृह तक लेकर जाएगा। वाराणसी कमिश्नर दीपक अग्रवाल ने कहा कि  श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए क्यू मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जा रहा है। मंदिर परिसर में होल्डिंग एरिया बन रही हैं, जहां श्रद्धालु दर्शन के लिए अपनी बारी की प्रतीक्षा करेंगे।

बाबा का रेड जोन हुआ अब नो पॉलीथिन जोन
श्री काशी विश्वनाथ का बाबा दरबार अब पूरी तरह से नो पॉलीथिन जोन घोषित हो गया है। मंदिर परिक्षेत्र में रहने वाले लोगों और श्रद्धालुओं को भी पॉलीथिन के इस्तेमाल पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।

विश्वनाथ मंदिर के साथ ही अन्नपूर्णा मंदिर में भी अब श्रद्धालु पॉलीथिन लेकर प्रवेश नहीं कर सकेंगे।  मंदिर के प्रवेश द्वार पर ही जवानों को यह निर्देश दिया गया है कि वह पॉलीथिन लेकर आने वाले श्रद्धालुआें की चेकिंग के दौरान ही पॉलीथिन जब्त कर लेंगे।
 
पॉलीथिन पर प्रतिबंध के बाद विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र का रेड जोन पूरी तरह से नो पॉलीथिन जोन बन गया है। मंदिरों से लेकर घरों में भी अब पॉलीथिन का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। विश्वनाथ मंदिर के सुरक्षाकर्मियों की सख्ती के कारण मंदिर परिक्षेत्र में रहने वाले लोग भी अब झोले में सामान लेकर आने-जाने लगे हैं। 
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मंदिर के उत्तरी द्वार पर लगे रजत द्वार बदलने के मामले ने पकड़ा तूल 

मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पंडित अशोक द्विवेदी - फोटो : अमर उजाला
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के उत्तरी द्वार पर लगे चांदी के दरवाजे बदलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य पंडित अशोक द्विवेदी का आरोप है कि अहिल्याबाई होल्कर के समय लगाए गए ऐतिहासिक द्वार को बदलकर मंदिर के शिल्प के साथ खिलवाड़ किया गया है।

बदला गया दरवाजा आखिर कहां गया, इसका भी कुछ पता नहीं है। वह इस मामले की जांच के लिए शासन को पत्र लिखेंगे। उधर, मंदिर प्रशासन ने किसी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है। 

दक्षिण भारत के दानदाता सुबू सुंदरम ने 11 फरवरी 2018 को विश्वनाथ मंदिर को 52 किलोग्राम चांदी से निर्मित दरवाजा भेंट किया था। दक्षिण भारतीय शैली में नक्काशी वाले दरवाजे को मंदिर के उत्तरी द्वार पर लगाया गया है।

काशी विश्वनाथ मंदिर के न्यास परिषद के अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी का कहना है कि यहां पहले लगे ऐतिहासिक दरवाजे और मौजूदा समय लगे दरवाजे के शिल्प में अंतर है। बदले गए दरवाजे कहां रखे गए हैं, इस बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी जा रही है।

दरवाजों को बदलने के लिए न तो न्यास परिषद से अनुमति ली गई और न कोई भी पूर्व में जानकारी दी गई। उधर, मंदिर के सीईओे विशाल सिंह का कहना है कि रजत द्वार मंदिर को दान में मिला है। चार महीने पहले दानदाता के पैसे से ही रजत द्वार को मंदिर में लगाया गया। तब से अब तक किसी तरह की गड़बड़ी की कोई शिकायत नहीं मिली है। 
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