श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के स्वर्णशिखर के कुंभाभिषेक पर नया विवाद शुरू हो गया। विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की अनुमति के बिना ही कुंभाभिषेक की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। इस प्रक्रिया के दौरान विश्वनाथ मंदिर के अधिनियम, प्रथा, परंपरा का उल्लंघन किया गया है।
मंदिर न्यास परिषद के अध्यक्ष ने इसे अशास्त्रीय बताते हुए जांच की मांग की है। दक्षिण भारतीय मंदिरों में होने वाली कुंभाभिषेक की प्रक्रिया को विश्वनाथ मंदिर के इतिहास में पहली बार किया गया।
18 मई को काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद की बैठक में भी इस पर चर्चा हुई थी। इस दौरान न्यास अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने कहा था कि नर्मदा से सिंधु नदी तक यह प्रथा पूरे उत्तर भारत में लागू नहीं है। खासकर विश्वनाथ मंदिर में कभी भी ऐसा नहीं हुआ है।
उन्होंने इस मामले में शृंगेरी मठ के शंकराचार्य से परामर्श लेने का निर्देश दिया था। बावजूद इसके बिना न्यास की अनुमति के मंदिर परिसर में चार दिवसीय कुंभाभिषेक का आयोजन किया गया।
दक्षिण भारत के मंदिर शिखर पर देवी-देवताओं के अनेक विग्रह स्थापित होते हैं और उन विग्रहों की साफ-सफाई के लिए कुंभाभिषेक का आयोजन होता है। वहीं उत्तर भारत के मंदिरों में शिखर पर कोई विग्रह की स्थापना नहीं होती है।