अब जल्दी ही काशी विश्वनाथ मंदिर से लेकर गंगा घाट तक बाबा के दरबार का प्राचीन भव्य रूप अस्तित्व में आ जाएगा। इससे जोड़कर एक सुसज्जित आनंद वन क्षेत्र भी विकसित होगा। काशी विश्वनाथ मंदिर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर संवारने का संकल्प डीरेका के मंच से जताने के अगले दिन ही राज्य सरकार ने इसके लिए 650 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दे दी।
इसके तहत दर्शनार्थियों के लिए समस्त आवश्यक सुविधाएं विकसित होंगी। श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के साथ ही अपना समय भी बिता सकेंगे। पीएम का यह ड्रीम प्रोजेक्ट होने के चलते इस पर काम भी बहुत तेजी से शुरू हो गया है।
यहां तक कि इस प्रोजेक्ट को मूर्त रूप देने के लिए पीएमओ ने डेडलाइन 20 अप्रैल तय कर दी है। अधिकारी इस पर दिन रात काम करने में जुट गए हैं। इस कार्य को पूरा करने के लिए कई विभागों के अधिकारियों को जोड़ा जा रहा है।
इस महत्वाकांशी योजना के तहत मंदिर को सोमनाथ मंदिर की तर्ज पर पूरे लाल पत्थरों से नागर शैली में तैयार किया जाएगा। इसके लिए काशी विश्वनाथ मंदिर से गंगा घाट तक पूरा क्षेत्र अधिगृहीत किया जाएगा। इसमें मंदिर का सीधा संपर्क गंगा घाट से होगा।
चार विशाल और भव्य प्रवेश द्वारों के साथ मंदिर परिसर को गंगा तक विस्तार देते हुए मंदिर परिसर का वृहद विकास किया जाएगा। प्राचीन काल में यह क्षेत्र आनंद वन के नाम से अस्तित्व में था। ग्रंथों में वर्णित उसी आनंद वन को 20 हजार वर्ग मीटर में पुन: स्थापित किया जाएगा।
मंदिर परिक्षेत्र में मिलने वाली सभी पुरातन प्रतिमाओं की जांच कराकर उनका जीर्णोद्धार भी कराया जाएगा। क्षेत्र के मंदिरों को परिसर में लेकर उनका भी विकास होगा। सभी मंदिरों-प्रतिमाओं की महत्व और इतिहास प्रतिमा के पास शिलापट्ट पर अंकित कराया जाएगा।
पीएम को प्रजेंटेशन के दौरान ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि इस प्रोजेक्ट में धन की कमी नहीं पड़ेगी और जरूरत होगी तो और धन दिया जाएगा।
वीडीए सचिव विशाल सिंह ने बताया कि मंदिर को आनंद वन के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। इसके लिए हर विषय से संबंधित विशेषज्ञों को बुलाया जा रहा है। इसके लिए 650 करोड़ रुपए का बजट भी स्वीकृत हो चुका है।
परियोजना के मुख्य उद्देश्य
- काशी की अजन्मी पौराणिकता को पुन: स्थापित करना
- इस ब्रह्मरसायन के प्राचीन शिवालयों व मंदिरों का जीर्णोंद्धार करना
- जनता को हरिदर्शन सहज और सुलभ एवं श्रेष्ठ कराना
- आनंद वन की परिपाटी को आधुनिक सुख सुविधाओं से परिपूर्ण करना