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मॉरीशस के पूर्व उपराष्ट्रपति पहुंचे अपने पैतृक गांव, परिजनों से कही ये खास बात

Fri, 16 Mar 2018 10:26 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,गाजीपुर
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मॉरीशस के पूर्व उपराष्ट्रपति ने पैतृक गांव पहुंचकर लोगों से की भोजपुरी में बात - फोटो : अमर उजाला
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मॉरीशस के पूर्व उपराष्ट्रपति अब्दुल रऊफ बंधन चार दिन के प्रवास पर गाजीपुर जिला स्थित पैतृक गांव नवली पहुंचे। वो पत्नी आशमा बेबी और पुत्र जैद के साथ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में पहुंचे। सुरक्षा दृष्टिकोण से इनका पूरा कार्यक्रम गोपनीय रखा गया था।

सुबह जब अचानक ग्रामीणों को जानकारी हुई तो लोग खुशी से झूम उठे। गांव के लोगों से मिलकर भोजपुरी में बात की। उन्होंने अपने परिजनों से कहा कि  ‘दू घंटा चलला पर त आपन गांव नवली पहुंचनी ह, जेकर मात्र दूरी 22 किमी बा..’, लेकिन सड़क क स्थिति ठीक नईखे औरी विकास खातिर सड़क बहुत जरूरी हौ।
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गांव के लोगों से कहा कि सौभाग्य है कि आज अपने पैतृक गांव आने का मौका मिला है, जो मेरे और मेरे परिवार के लिए एक अविस्मरणीय क्षण है। उन्होंने सड़क को लेकर अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि एक दिन भारत हर क्षेत्र में चीन से आगे होगा।

भारत एक बहुत बड़ा मुल्क है, इंशा अल्लाह दुआ करता हूं कि यह देश हमेशा प्रगति करे और यहां रहने वाले लोग हमेशा खुश रहें। एक न एक दिन भारत विश्व की महाशक्ति जरूर बनेगा। उन्होंने कहा कि मॉरीशस और भारत की संस्कृति एक समान है।

मॉरीशस में 70 प्रतिशत आबादी भारतीयों की है। वहां चिकित्सा एवं शिक्षा मुफ्त दी जाती है। उन्होंने बताया कि पहली दफा भारत से वर्ष 1835 में चार लाख 30 हजार लोग मॉरीशस नाव से पहुंचे तो वहां अथक परिश्रम कर गुजर बसर करते थे। बड़े-बड़े चट्टानों को इस लालच में तोड़वाया जाता था कि इसके नीचे सोने की खदान मिलेगी।  
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उप राष्ट्रपति को बोलते देख अचरज में पड़े ग्रामीण

मॉरीशस के पूर्व उपराष्ट्रपति ने पैतृक गांव पहुंचकर लोगों से की भोजपुरी में बात - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद मस्जिद के मौलाना ने उनकी लंबी उम्र और देश के साथ सभी वर्गों के लिए अमन-चैन, शांति की दुआ की। देर शाम उनका काफिला डाक बंगले के लिए रवाना हो गया। 16 मार्च को वह अपने पैतृक गांव स्थित शाही मस्जिद में जुमे की नमाज अदा करेंगे।

इसके बाद 17 मार्च को गाजीपुर में अपने नाती अजहर की शादी में भाग लेने के बाद मॉरीशस के लिए रवाना हो जाएंगे। उन्होंने ग्रामीणों को मारीशस आने का न्योता भी दिया। पूर्व उपराष्ट्रपति अब्दुल रऊफ बंधन मॉरीशस के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भी रह चुके हैं।

उन्होंने अपने पैतृक गांव के लोगों से भोजपुरी में बात की। उनको भोजपुरी में बातचीत करते देख लोग हैरान थे। बताया कि मॉरीशस की कुल आबादी 12 लाख है, वहां 95 प्रतिशत लोग शिक्षित हैं। कहा कि शिक्षा बहुत जरूरी है।

अब्दुल राउफ बंधन का जन्म 1937 में मॉरीशस में हुआ था। वह 2002 से 2007 तक मारीशस के उपराष्ट्रपति रहे। 25 फरवरी 2002 को मॉरीशस की नेशनल एसेंबली से पांच साल की अवधि के लिए चुने गए। कार्यकाल संभालने से पहले वह फ्रांस में मॉरीशस के राजदूत थे।

वह मॉरीशस की नेशनल एसेंबली के दो पदों के लिए भी सदस्य रहे। 1967 से 1976 और 1992 से 2000 तक और 1969 से 1975 तक वह युवा और खेल मंत्री रहे। 1969 में सेवुओसगुर रामगुलाम ने उन्हें संसदीय सचिव नियुक्त किया था।

इससे पहले1866 में उनके दादा बुंधन और दादी राज बासिय भारत से मारीशस गए। पूर्व उपराष्ट्रपति के ऊपर 2010 में जीवनी ऑन द विंग्स ऑफ डेस्टिन: ए राउफ बंधन भी लिखी गई।
 
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