मॉरीशस के पूर्व उपराष्ट्रपति अब्दुल रऊफ बंधन चार दिन के प्रवास पर गाजीपुर जिला स्थित पैतृक गांव नवली पहुंचे। वो पत्नी आशमा बेबी और पुत्र जैद के साथ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में पहुंचे। सुरक्षा दृष्टिकोण से इनका पूरा कार्यक्रम गोपनीय रखा गया था।
सुबह जब अचानक ग्रामीणों को जानकारी हुई तो लोग खुशी से झूम उठे। गांव के लोगों से मिलकर भोजपुरी में बात की। उन्होंने अपने परिजनों से कहा कि ‘दू घंटा चलला पर त आपन गांव नवली पहुंचनी ह, जेकर मात्र दूरी 22 किमी बा..’, लेकिन सड़क क स्थिति ठीक नईखे औरी विकास खातिर सड़क बहुत जरूरी हौ।
गांव के लोगों से कहा कि सौभाग्य है कि आज अपने पैतृक गांव आने का मौका मिला है, जो मेरे और मेरे परिवार के लिए एक अविस्मरणीय क्षण है। उन्होंने सड़क को लेकर अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि एक दिन भारत हर क्षेत्र में चीन से आगे होगा।
भारत एक बहुत बड़ा मुल्क है, इंशा अल्लाह दुआ करता हूं कि यह देश हमेशा प्रगति करे और यहां रहने वाले लोग हमेशा खुश रहें। एक न एक दिन भारत विश्व की महाशक्ति जरूर बनेगा। उन्होंने कहा कि मॉरीशस और भारत की संस्कृति एक समान है।
मॉरीशस में 70 प्रतिशत आबादी भारतीयों की है। वहां चिकित्सा एवं शिक्षा मुफ्त दी जाती है। उन्होंने बताया कि पहली दफा भारत से वर्ष 1835 में चार लाख 30 हजार लोग मॉरीशस नाव से पहुंचे तो वहां अथक परिश्रम कर गुजर बसर करते थे। बड़े-बड़े चट्टानों को इस लालच में तोड़वाया जाता था कि इसके नीचे सोने की खदान मिलेगी।