श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास परिषद ने कुंभाभिषेकम से पूर्व लगवाए गए दो रजत मंडित द्वार और चौखट हटाने का निर्णय लिया है। दोनों द्वार पर अंकित किए गए यजमानों के नाम भी मिटाए जाएंगे।
मंगलवार को हुई न्यास परिषद की बैठक में श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) को भविष्य में न्यास परिषद की अनुमति के बगैर किसी भी धार्मिक प्रथा और परंपराओं से जुड़े कार्यों पर खुद फैसला नहीं करने का भी निर्देश दिया गया।
इसके साथ ही गर्भ गृह के बाहर से जलाभिषेक करने की व्यवस्था समेत मंदिर के विकास से जुड़े 14 प्रस्तावों पर विचार-विमर्श के बाद ज्यादातर पर सहमति व्यक्त की गई। न्यास परिषद की 95वीं बैठक में जुलाई में कराए गए कुंभाभिषेकम का मामला न्यास परिषद अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने स्वयं उठाया।
उन्होंने बताया कि श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर की प्रथा-परंपरा में कुंभाभिषेकम कराना उचित नहीं था। काशी विश्वनाथ मंदिर के अधिनियम में इसका उल्लेख नहीं है। साथ ही यह भी यह भी निर्देशित किया कि भविष्य में इसे नजीर न बनाया जाए।