श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में सावन के प्रथम सोमवार को यादव बंधुओं द्वारा जलाभिषेक की परंपरा है। गोप सेवा समिति वर्ष 1932 से परंपरा का निर्वहन करती आ रही है। नौ शिवालयों में जलाभिषेक निरंतर किया जा रहा है। पिछले साल एक दूसरे गुट को भी जलाभिषेक की अनुमति मिली थी, इसको लेकर ही इस बार विवाद शुरू हुआ है। गोप सेवा समिति का तर्क है कि जब किसी भी नई शुरुआत की इजाजत शासन की ओर से नहीं है तो गत वर्ष क्यों दूसरे गुट को जलाभिषेक के लिए अलग से अनुमति दी गई।
पदाधिकारियों का कहना है कि प्रशासन अपने रिकॉर्ड खंगाले और उसके अनुसार ही गोप सेवा समिति को जलाभिषेक की अनुमति दी जाए। समिति के लोग ही यदुवंशी समाज का ध्वज लेकर जलाभिषेक यात्रा में शामिल होते हैं।
दूसरा गुट पारिवारिक परंपरा को सार्वजनिक बनाने का प्रयास कर रहा है। वहीं दूसरे पक्ष ने इस वर्ष भी जलाभिषेक की इजाजत के लिए आवेदन दे रखा है। चंद्रवंशी गोप सेवा समिति के अध्यक्ष लालजी यादव ने बताया कि जलाभिषेक की परंपरा को राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है। 22 जुलाई को पुलिस प्रशासन के साथ बैठक में जलाभिषेक पर निर्णय लिया जाएगा।