फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Varanasi: सावन पूर्णिमा पर टूट गई 358 साल पुरानी काशी की परंपरा, महंत आवास से नहीं निकली बाबा की पालकी यात्रा

Mon, 19 Aug 2024 06:50 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

सावन पूर्णिमा पर काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास से पालकी यात्रा निकालने पर रोक लगा दी गई। इसके विरोध में विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत की पत्नी अनशन पर बैठ गईं।  
विज्ञापन
महंत आवास पर रखी बाबा की प्रतिमा व कुलपति तिवारी की पत्नी को समझाती एसीपी प्रज्ञा पाठक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

धर्म, संस्कृति और परंपराओं के शहर बनारस में सावन पूर्णिमा पर 358 साल की परंपरा सोमवार को पहली बार टूट गई। काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन के आदेश पर महंत आवास से निकलने वाली बाबा विश्वनाथ की पंचबदन चल रजत प्रतिमा की यात्रा रोक दी गई। महंत कुलपति तिवारी की दिव्यांग (दृष्टिबाधित) पत्नी मोहिनी देवी अनशन पर बैठ गईं। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास को पुलिस ने छावनी में तब्दील कर दिया। अधिकारियों के समझाने पर देर शाम मोहिनी देवी ने अनशन समाप्त कर दिया, लेकिन परंपरा को बहाल करने के लिए प्रशासन को सप्ताह भर की मोहलत दी। 

विज्ञापन




मोहिनी ने कहा कि सप्ताह भर के अंदर शासन की ओर से परंपरा बहाली का पत्र नहीं मिला तो वह अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगीं। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर सोमवार सुबह से ही पुलिस तैनात कर दी गई। साथ ही महंत परिवार को प्रतिमा की यात्रा नहीं निकालने का पत्र भी थमा दिया गया। 
विज्ञापन




सुबह से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हुआ, लेकिन पुलिस ने सभी को वापस कर दिया। परंपरा के अनुसार विश्वनाथ मंदिर में झूलनोत्सव से पहले महंत आवास पर बाबा की पंचबदन प्रतिमा का विशेष श्रृंगार किया गया। पालकी यात्रा पर कोई निर्णय नहीं हुआ तो पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी की पत्नी मोहिनी देवी ने अनशन शुरू कर दिया।



इसके बाद एसीपी प्रज्ञा पाठक उनको मनाने पहुंचीं। एसीपी ने हाथ जोड़कर मानमनौवल भी की। इस पर मोहिनी ने कहा कि वाराणसी के जिला प्रशासन ने हमारे परिवार की परंपरा पर कब्जा कर लिया। उन्होंने देर शाम अनशन समाप्त कर दिया। 


सारी परंपराएं निभाई गई : मंडलायुक्त 
मंडलायुक्त कौशलराज ने कहा कि विश्वनाथ मंदिर परिसर में सारी परंपराएं निभाई गई हैं। इसमें हजारों भक्तों ने हिस्सा भी लिया। पालकी यात्रा के लिए सभी पक्षों को बुलाया गया था। एक पक्ष ने उत्साह से हिस्सा लिया। झूलनोत्सव में भी प्रतिभाग किया, लेकिन दूसरा पक्ष मंदिर नहीं आया। उन्होंने अपने घर पर परंपराओं का निर्वहन किया है। इसमें किसी तरह का व्यवधान नहीं डाला गया। उम्मीद है कि मंदिर की परंपराओं में सभी पक्ष आगे भी हिस्सा लेंगे। यह परंपरा काशीवासियों और सभी भक्तों की है। किसी एक परिवार की परंपरा नहीं है।



पूर्व महंत की पत्नी बोलीं
महंत परिवार की महिलाएं कभी पर्दे के बाहर नहीं आईं, लेकिन पूर्वजों की व्यवस्था और पति के जीवन काल के संघर्षों, जिससे काशी की पहचान है, का खंडित होना काशी की परंपरा का अपमान है। मोहिनी देवी, पत्नी, पूर्व महंत डॉ. कुलपति तिवारी

विज्ञापन

क्या बोले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष

काशी की परंपराओं को ध्वस्त किया जा रहा है। बाबा विश्वनाथ की पालकी यात्रा काशीवासियों की अपनी परंपरा है, जो 358 वर्षों से अनवरत चली आ रही है। इसे इस तरह से खंडित करना उचित नहीं है। - अजय राय, प्रदेश अध्यक्ष कांग्रेस
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें