इधर, बाबा के दरबार में रोजाना भीड़ उमड़ रही है। रविवार सुबह से भक्तों की लंबी कतार लगी है। पौष के महीने में सावन की तरह भक्तों की कतार उमड़ी तो मंदिर परिक्षेत्र की गलियं ठसाठस हो गईं। गोदौलिया से मैदागिन तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। श्री काशी विश्वनाथ धाम में मंगला आरती के बाद से भक्तों की कतार लगी है।
मंदिर के मुख्य परिसर में चारों दरवाजों से भक्तों को प्रवेश दिया जा रहा है। दोपहर एक बजे तक करीब 60 हजार लोगों ने बाबा दरबार में हाजिरी लगाई। मंदिर प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार बिना मास्क के प्रवेश मंदिर में नहीं मिलेगा और सामाजिक दूरी का पालन करना अनिवार्य है।
काशी विश्वनाथ धाम में विशालकाय दरवाजे शिवभक्तों के बीच आकर्षण का केंद्र है। किसी विशाल किले के द्वार जैसी अनुभूति देने वाले दरवाजों का निर्माण राजस्थान में हुआ। विश्वनाथ धाम के मुख्य परिसर में लगे चारों दरवाजों का वजन करीब 13 टन है। इन दरवाजों का निर्माण राजस्थान के जालोर के रामसीन गांव में हुआ। जालोर से बनारस ट्रकों से लाया गया। सफाई और पॉलिश धाम में ही किया गया।
श्री काशी विश्वनाथ धाम
- फोटो : अमर उजाला
पहले चरण का काम पूरा होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका 13 दिसंबर को उद्घाटन कर दिया है। इसके बाद से ही धाम में बाबा दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। इस बीच दूसरे चरण का काम शुरू हो गया है। वैसे तो चार गेट से धाम में प्रवेश की बात कही गई थी लेकिन अभी गंगा की तरफ से गेट (गेटवे ऑफ कॉरिडोर) नहीं बन सका है।
इधर, धाम के भवनों का संचालन शुरू नहीं होने से श्रद्धालु केवल बाबा का दर्शन करके ही लौट रहे हैं। धाम में बने इंपोरियम, वाराणसी गैलरी, सिटी म्यूजियम, मुमुक्षु भवन व आध्यात्मिक पुस्तक केंद्र के संचालन के लिए श्रीकाशी विश्वनाथ विशिष्ट विकास क्षेत्र परिषद की ओर से कंपनी के चयन की प्रक्रिया चल रही है।
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