अस्सी घाट पर कार्यक्रम
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श्रीकाशी विश्वनाथ धाम यात्रा के तहत अस्सी घाट पर तीन दिवसीय लोकरंग महोत्सव का समापन शुक्रवार को हुआ। पौष के महीने में श्रोताओं को लोककलाकारों ने फागुन का अहसास करा दिया। मथुरा के कलाकारों ने गंगा के तट पर काशीवासियों को फागुन महीने की याद दिला दी। ब्रज और बरसाने की होली के लोकनृत्य की मनोहारी प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही।
अस्सी घाट पर लोकरंग महोत्सव में मथुरा के कलाकारों ने आज खेलन बरसाने आए हैं नटवर नागर होली...के जरिए ब्रज की होली के सभी रंग बिखेर दिए। इसके बाद बरसाने की होली के तहत आज बिरज में होरी रे रसिया...की प्रस्तुति दी। इसके पूर्व राजस्थान के कलाकारों ने घूमर-घूमर की बेहतरीन प्रस्तुति से श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया।
इसके अलावा गुजरात का पारंपरिक मडियारा, पश्चिम बंगाल का बाउल गान, हिमाचल प्रदेश का लुड्डी नृृत्य, असम का भोरताल, केरल का चेंडा, तमिलनाडु का करंगम पेश हुआ। दूसरे सत्र में त्रिपुरा का बीजू नृत्य, मणिपुर का लाई हरोबा, गोवा का समई, पांडिचेरी का कालियाट्टम, मध्य प्रदेश का बधाई, बिहार का शिव जागरण, राजस्थान का कालबेलिया, आंध्र प्रदेश का वीरनाट्यम, मध्यप्रदेश का राई, राजस्थान का चेरी, छत्तीसगढ़ का पन्थी, कश्मीर का रउफ, कर्नाटक का महिला वीरागसे, महाराष्ट्र का लावणी, मथुरा का चरकुला, पश्चिम बंगाल का हरे कृष्ण वाद्य कला, पंजाब के भांगड़ा की प्रस्तुतियां हुईं।
संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम का संयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा, अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. लवकुश द्विवेदी एवं क्षेत्रीय सांस्कृतिक अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने किया।