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काशी विश्वनाथ धाम: आज से श्रद्धालुओं के लिए खुल गया सरस्वती फाटक, रोजाना सवा लाख से ज्यादा भक्त कर रहे दर्शन

Sat, 25 Dec 2021 10:18 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जांच केंद्रों की संख्या बढ़ा दी गई है। श्रद्धालुओं के जूते चप्पल रखने की व्यवस्था भी मंदिर के अंदर कर दी गई है। 
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श्री काशी विश्वनाथ धाम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्री काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए आज से सरस्वती फाटक खुल गया। मंदिर में मुख्य प्रवेश और निकास के द्वार खोल दिए गए हैं और जल्द ही गोदौलिया फाटक से भी श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाएगा। धाम के लोकार्पण के बाद बाबा के दर्शन के लिए रोजाना सवा से डेढ़ लाख श्रद्धालु बाबा दरबार में दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।  

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काशी विश्वनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए जांच केंद्रों की संख्या बढ़ा दी गई है। श्रद्धालुओं के जूते चप्पल रखने की व्यवस्था भी मंदिर के अंदर कर दी गई है। अब बाबा के मंदिर तक कोई भी श्रद्धालु जूता-चप्पल पहनकर नहीं जा सकेगा। शुक्रवार से मंदिर में दिव्यांग और बुजुर्ग श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए रैंप भी चालू कर दिया गया है।

मंदिर चौक पर ही श्रद्धालुओं की कतार
मंदिर के पूर्वी गेट को मंदिर चौक तक खोल दिया गया है। मंदिर प्रशासन की ओर से किए गए इंतजाम के बाद अब मंदिर चौक पर ही श्रद्धालुओं की कतार लग रही है। इससे ज्ञानवापी गेट पर लगने वाले जाम से राहत मिली है। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते जल्द ही सभी प्रवेश और निकास द्वार खोल दिए जाएंगे। शनिवार से सरस्वती फाटक से श्रद्धालु मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे और दो से तीन दिनों के अंदर गोदौलिया गेट से भी प्रवेश की सुविधा शुरू हो जाएगी। मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए चारों गेट खोल दिए गए हैं। 

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अस्सी पर बिखरे बरसाने की होली के सतरंगी रंग

अस्सी घाट पर कार्यक्रम - फोटो : अमर उजाला
श्रीकाशी विश्वनाथ धाम यात्रा के तहत अस्सी घाट पर तीन दिवसीय लोकरंग महोत्सव का समापन शुक्रवार को हुआ। पौष के महीने में श्रोताओं को लोककलाकारों ने फागुन का अहसास करा दिया। मथुरा के कलाकारों ने गंगा के तट पर काशीवासियों को फागुन महीने की याद दिला दी। ब्रज और बरसाने की होली के लोकनृत्य की मनोहारी प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। 

अस्सी घाट पर लोकरंग महोत्सव में मथुरा के कलाकारों ने आज खेलन बरसाने आए हैं नटवर नागर होली...के जरिए ब्रज की होली के सभी रंग बिखेर दिए। इसके बाद बरसाने की होली के तहत आज बिरज में होरी रे रसिया...की प्रस्तुति दी। इसके पूर्व राजस्थान के कलाकारों ने घूमर-घूमर की बेहतरीन प्रस्तुति से श्रोताओं को झूमने पर विवश कर दिया। 
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अस्सी घाट पर कलाकार - फोटो : अमर उजाला
इसके अलावा गुजरात का पारंपरिक मडियारा, पश्चिम बंगाल का बाउल गान, हिमाचल प्रदेश का लुड्डी नृृत्य, असम का भोरताल, केरल का चेंडा, तमिलनाडु का करंगम पेश हुआ। दूसरे सत्र में त्रिपुरा का बीजू नृत्य, मणिपुर का लाई हरोबा, गोवा का समई, पांडिचेरी का कालियाट्टम, मध्य प्रदेश का बधाई, बिहार का शिव जागरण, राजस्थान का कालबेलिया, आंध्र प्रदेश का वीरनाट्यम, मध्यप्रदेश का राई, राजस्थान का चेरी, छत्तीसगढ़ का पन्थी, कश्मीर का रउफ, कर्नाटक का महिला वीरागसे, महाराष्ट्र का लावणी, मथुरा का चरकुला, पश्चिम बंगाल का हरे कृष्ण वाद्य कला, पंजाब के भांगड़ा की प्रस्तुतियां हुईं।

संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित कार्यक्रम का संयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक प्रो. सुरेश शर्मा, अयोध्या शोध संस्थान के निदेशक डॉ. लवकुश द्विवेदी एवं क्षेत्रीय सांस्कृतिक अधिकारी डॉ. सुभाष चंद्र यादव ने किया। 
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