इससे पहले पीएम मोदी ने जैसे ही शिलापट्ट पर से पर्दा हटाया पूरा परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा। पीएम ने अपना संबोधनन शुरू करते हुए हर-हर महादेव का जयघोष किया तो साथ ही मां गंगा की भी स्तुति की। पीएम मोदी ने कहा कि यह कार्य मैंने नहीं बाबा विश्वनाथ ने किया और करवाया है काहे कि बाबा विश्वनाथ के आगे कोई कितनो बड़ा होई अपने घरे का होई।
भोजपुरी में कहा कि काशी के सभी बंधुओं के साथ बाबा विश्वनाथ के चरणों में हम शीश नवावत हई। माता अन्नपूर्णा के चरण का बारंबार वंदन करत हई। अभी मैं बाबा के साथ साथ नगर कोतवाल काल भैरव के दर्शन करके आ रहा हूं, देश वासियों के लिए उनका आशीर्वाद लेकर आ रहा हूं।
काशी विश्वनाथ धाम में पीएम मोदी
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अपने संबोधन में पीएम मोदी ने मजदूरों को खासतौर पर श्रेय देते हुए कहा कि मैं आज हर उस श्रमिक भाई-बहनों का भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं जिनका पसीना इस इस भव्य परिसर के निर्माण में बहा है। कोरोना के इस विपरित काल में भी उन्होंने यहां पर काम रुकने नहीं दिया। पीएम मोदी ने मजदूरों संग पंगत में बैठकर भोजन किया।
काशी विश्वनाथ धाम पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री ने काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव का आशीर्वाद लिया। काल भैरव की पूजा-अर्चना और आरती उतारने के बाद अलकनंदा क्रूज से गंगा के रास्ते वह विश्वनाथ मंदिर पहुंचे। ललित घाट पर क्रूज से उतर कर गंगा स्नाना किया और कलश में जल लेकर पैदल ही विश्वनाथ धाम रवाना हुए। पीएम के गंगा तट पर पहुंचते ही रुद्राष्टकम, रुद्री, शिव पंचाक्षरी सहित तमाम मंत्रोच्चार पीएम के संकल्प की संपूर्णता का जयघोष किया।
शंख, डमरू, घड़ियाल की गुंजयमान ध्वनि भी गुंजायमान होती रही। रवियोग के अदभुत संयोग में राजोपचार विधि से देश की सभी नदियों के जल से काशीपुराधिपति का अभिषेक कर पीएम मोदी मुख्य यजमान बनें और विधिविधान से आदि विश्वेश्वर का पूजन किया। लोकार्पण से पहले धाम पर बनी एक फिल्म भी पीएम मोदी ने देखी।