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फणीश्वर नाथ की रचनाओं में बसती हैं जन-जन की धड़कन

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वाराणसी। हिंदुस्तानी एकेडमी प्रयागराज के अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि फणीश्वर नाथ रेणु की रचनाएं अंचल को तोड़कर विशद भारतीय भूमि का वर्णन करती हैं। उनकी रचनाओं में जन-जन की धड़कनें बसती हैं।
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वह रविवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में हिंदी विभाग की ओर से आयोजित फणीश्वर नाथ रेणु सृजन, सौंदर्य और सरोकार विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. टीएन सिंह ने कहा कि कथाकार प्रेमचंद और अप्रतिम सर्जक फणीश्वर नाथ रेणु का गहरा संबंध काशी विद्यापीठ से था। प्रेमचंद गांव के किसान और आम आदमी के लेखक थे। साथ ही उन्होंने विद्यापीठ में अध्यापन भी किया था। इसी तरह रेणु की वैचारिकी के निर्माण में आचार्य नरेंद्र देव की केंद्रीय भूमिका थी। जेएनयू के प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि रेणु के निर्माण में बंगाल और नेपाल की महत्वपूर्ण भूमिका है। रेणु की रचना भूमि नेपाल, मिथिलांचल, बंगाल और मुंबई तक है। नीरज खरे ने कहा कि नई कहानियों की प्रवृति निर्धारण में रेणु की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। डीएवी आजमगढ़ की डॉ. गीता सिंह ने कहा कि रेलणु की कहानियों के साक्ष्य पर उनकी विलक्षणता का विश्लेषण किया है। संचालन प्रो. निरंजन सहाय ने किया। स्वागत विभागाध्यक्ष प्रो. अनुराग कुमार और डॉ. विजय रंजन ने किया। इस दौरान डॉ. प्रीति, प्रो. सुरेन्द्र प्रताप, प्रो. अनुराग, नीलम सिंह, डॉ अनुकूल चंद राय ने विचार व्यक्त किए।
प्रथम प्रेमचंद सृजन सम्मान डॉ. उदय प्रताप सिंह को
वाराणसी। काशी विद्यापीठ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर हिंदी तथा आधुनिक भारतीय भाषा विभाग की ओर से हर साल दिए जाने वाले तीन सम्मानों की शुरुआत रविवार से हुई। प्रथम प्रेमचंद सृजन सम्मान हिन्दुस्तानी एकेडेमी अध्यक्ष प्रयागराज डॉ. उदय प्रताप सिंह को दिया गया। कुलपति प्रो. टीएन सिंह को स्टैनफ ोर्ड विश्वविद्यालय अमेरिका द्वारा जारी विश्व वैज्ञानिक सूची में शामिल होने पर शिवप्रसाद गुप्त सम्मान प्रदान किया गया। सामाजिक सरोकार सम्मान डॉ. अल्पना सिंह को प्रदान किया गया।
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