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Kashi Tamil Sangmam: काशी में विराजते हैं तमिल समुदाय के आराध्य और कुलदेवी, 5 कौड़ियों का क्यों करते हैं दान?

Fri, 18 Nov 2022 09:11 AM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

चिंतामणि गणेश मंदिर के महंत चल्लासुब्बाराव शास्त्री ने बताया कि काशी में श्री काशी विश्वनाथ को मिलाकर कुल 59 प्रमुख शिवलिंग हैं। 12 आदित्य, 56 विनायक है, अष्ट भैरव, नौ दुर्गा, 13 नरसिंह तथा 16 केशव हैं। दक्षिण भारतीयों में मान्यता है कि कांची कामाक्षी, मदुरै मीनाक्षी और काशी विशालाक्षी तीनों सगी बहनें हैं।
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वाराणसी का एक घाट। - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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विस्तार
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कण-कण शंकर की नगरी शैव संप्रदाय को मानने वाले तमिल भाषियों की आस्था का केंद्र है। आदि केशव से अस्सी के बीच तमिलनाडु के श्रद्धालुओं की श्रद्धा के केंद्र के रूप में कई मंदिर हैं। तमिल समुदाय के आराध्य आदि विश्वेश्वर और कुलदेवी विशालाक्षी काशी में ही विराजती हैं। तमिलनाडु सहित दक्षिण भारत के राज्यों से आने वाले श्रद्धालु बिना इस मंदिर में मत्था टेके बिना काशी यात्रा को पूर्ण नहीं मानते हैं।

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चिंतामणि गणेश मंदिर के महंत चल्लासुब्बाराव शास्त्री ने बताया कि काशी में श्री काशी विश्वनाथ को मिलाकर कुल 59 प्रमुख शिवलिंग हैं। 12 आदित्य, 56 विनायक है, अष्ट भैरव, नौ दुर्गा, 13 नरसिंह तथा 16 केशव हैं। दक्षिण भारतीयों में मान्यता है कि कांची कामाक्षी, मदुरै मीनाक्षी और काशी विशालाक्षी तीनों सगी बहनें हैं। दक्षिण भारतीय वहां मीनाक्षी और कामाक्षी का दर्शन तो कर लेते हैं लेकिन विशालाक्षी के दर्शन के लिए काशी आते हैं। इसके अलावा चिंतामणि गणेश मंदिर और शृंगेरी मठ भी उनका प्रमुख केंद्र है। गौरी केदारेश्वर, तिलभांडेश्वर और हनुमान घाट पर स्थित मंदिरों में वह मत्था जरूर टेकते हैं।  

काशी तमिल संगमम के मंच पर कलाकारों की प्रस्तुति - फोटो : अमर उजाला
विशालाक्षी मंदिर के महंत राजनाथ तिवारी ने बताया कि दक्षिण भारतीय श्रद्धालु जब काशी आते हैं तो विशालाक्षी देवी का दर्शन करके तीनों बहनों के दर्शन का पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं। काशी विश्वनाथ का दर्शन करने के बाद तमिल समुदाय के लोग मां अन्नपूर्णा का दर्शन व प्रसाद ग्रहण करने के बाद माता विशालाक्षी के दर्शन करते हैं। तमिल समुदाय के तीर्थ पुरोहित राकेश पंडा ने बताया कि आदिकेशव का दर्शन करके काशी में घाट-घाट होते हुए धार्मिक यात्रा करने की प्राचीन परंपरा है। मणिकर्णिका तीर्थ से ही पंचक्रोशी और अंतरगृही परिक्रमा आरंभ होती है। 
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काशी-तमिल समागम के लिए तैयार है काशी - फोटो : अमर उजाला
मणिकर्णिका तीर्थ पर करते हैं स्नान
तमिल समुदाय के लोग काशी वास के दौरान दशाश्वमेध, अस्सी, पंचगंगा और मणिकर्णिका तीर्थ पर गंगा स्नान जरूर करते हैं। इसके अलावा तमिल समुदाय में काशी करवट का भी प्रमुख स्थान हैं। काशी के कोतवाल कालभैरव के दर्शन की भी अपनी मान्यता है। 

कौड़िया देवी पर आते हैं कौड़ी चढ़ाने
काशी में कौड़िया देवी को भगवान विश्वनाथ की मानस बहन की मान्यता प्राप्त है। दक्षिण भारत के श्रद्धालु मंदिर में प्रसाद के रूप में 5 कौड़िया दान कर पूजन करते हैं। इसमें से एक कौड़ी अपने खजाने में ले जाकर रखते हैं। मान्यता है कि इससे धन का भंडार हमेशा भरा रहता है। इसी के चलते यहां दूर-दूर से भक्त आते हैं।
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