काशी तमिल संगमम के द्वितीय संस्करण में तीसरे दिन नमोघाट के मुक्ताकाशी मंच तमिलनाडु एवं काशी संगीत का संगम बना। लोकसंगीत की धूम रही। शास्त्रीय संगीत के साथ वाद्यवृंद के स्वरों से सभी आनंदित हो उठे।
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र प्रयागराज एवं दक्षिण क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र तंजावूर संस्कृति मंत्रालय की ओर से आयोजित तमिल संगमम में तमिलनाडु एवं काशी के कलाकारों ने प्रस्तुतियों से विभोर किया। ऊटी के बी पुष्प कुमार के मार्ग दर्शन में सहयोगी कलाकारों ने कोठा ट्राइबल डांस से रोमांचित कर दिया। नीलगिरी पर्वत श्रंखला के थोड़ा आदिवासी समूह की सुधानंत थिरमालाई के निर्देशन में थोड़ा राट्राइबल नृत्य से दर्शकों को परिचित कराया।
नाद द सोल ऑफ म्यूजिक समूह के कलाकारों ने वृन्द वादन से मोह लिया। सितार पर आनंद मिश्र, संतूर पर नवीन भास्कर, वायलिन पर राहुलदास चौरसिया, तबले पर पंकज राय तथा डॉ. संदीप राव केवले की प्रस्तुति रही। बीएचयू संगीत विभाग की पूर्व अध्यक्ष डॉ. संगीता पंडित ने शिष्यों संग गायन से शास्त्रीय संगीत से शीतलता प्रदान किया। उन्होंने राम भजन- श्रीरामचन्द्र कृपालु भजमन...। दादरा के बोल थे- सावरिया प्यारा रे मोरी गुईया...। समापन पं. हरिराम द्विवेदी की रचना से बोल थे- लहर लहर लहराए गंगा... से किया।