पुलिस कमिश्नर मुथा अशोक जैन ने कहा कि युवाओं को साहित्य से जोड़ने की जरूरत है। साहित्यकार प्रो. सूर्यप्रकाश दीक्षित ने कहा कि साहित्य हमें संवेदनशील बनाता है। संयोजक प्रो. राममोहन पाठक ने कहा कि भारतेंदु बाबू, जयशंकर प्रसाद, रामचंद्र शुक्ल जैसे साहित्यकारों की तपोस्थली पर पहली बार आयोजित साहित्य महोत्सव का आयोजन हम सभी का विनम्र प्रयास है। स्वागत शरद कुमार त्रिपाठी एडवोकेट ने किया।
प्रथम अकादमिक सत्र में साहित्य के परिप्रेक्ष्य, परंपरा और वर्तमान पर चर्चा हुई। शाम को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में सुरेंद्र शर्मा समेत स्थानीय कवियों की कविताओं ने श्रोताओं को गुदगुदाया। महोत्सव में 13 राज्यों के साहित्यकार व साहित्यसेवी शिरकत कर रहे हैं।
इस दौरान समाज की 26 विभूतियों को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। संचालन अभिनव अरुण ने किया। इस दौरान आरके चौधरी, रेवती साकलकर, राजेंद गोयनका, डॉ. अजित सैगल, सुषमा अग्रवाल, सुभाष सिंह, अत्रि भारद्वाज, अमितांशु पाठक, डॉ. किंशुक पाठक मौजूद रहे।