स्वतंत्रता संग्राम में प्राणों की आहुति देने वाली वीरांगना व काशी की बेटी मनु को काशी ने ही भूला दिया। न कोई आयोजन हुआ और ना ही काशी की जनता श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंची। काशी की बेटी मनु की जन्मस्थली भदैनी पर हर दिन की तरह ही सन्नाटा पसरा था। पुण्यतिथि पर हर साल की तरह सामाजिक संगठनों की ओर से ही शाम को दीप जलाकर श्रद्धांजलि की रस्म अदायगी की गई। बृहस्पतिवार को झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की 164वीं पुण्यतिथि पर न तो कोई सरकारी आयोजन हुआ और न ही जनता ने उन्हें याद रखा। सामाजिक संगठनों ने वीरांगना को नमन तो किया, लेकिन गिनती के लोग ही श्रद्धासुमन अर्पित करने पहुंचे। आयोजकों का कहना था कि कोरोना काल और बरसात के कारण लोगों की संख्या सीमित रही। जागृति फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित स्मृति समारोह का शुभारंभ महारानी लक्ष्मीबाई की स्मृति में दीप जलाया गया।
पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडेय, साहित्यकार जय प्रकाश मिश्र, प्रियम मिश्र, सीपी जैन, रामयश मिश्र ने संयुक्त रूप से प्रथम दीप जलाया। प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडेय ने कहा कि काशी की बेटी ने स्वतंत्रता संग्राम में अपना बलिदान देकर हर किसी के लिए एक मिसाल कायम की। साहित्यकार जय प्रकाश मिश्र ने कहा कि वीरांगना ने देश को आजाद कराने में जो योगदान दिया है उसे देश की पीढ़ी कभी नहीं भूलेगी। रामयश मिश्र ने केंद्र सरकार से वाराणसी से ग्वालियर तक जाने वाली बुंदेलखंड एक्सप्रेस का नाम वीरांगना एक्सप्रेस रखने की मांग फिर दोहराई। इस अवसर पर दिनेश मिश्र, विनय मिश्र हरिनाथ गौड़ उपस्थित थे।