वाराणसी। श्री काशी विश्वनाथ धाम से हटाई गई दुर्मुख विनायक प्रतिमा के पुराने और नए मूर्ति स्थल का काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी ने मंगलवार देर शाम निरीक्षण किया। उन्होंने मूर्ति हटाने की प्रक्रिया का वीडियो मांगा। हालांकि, मंदिर प्रशासन की ओर से वीडियो तो नहीं उपलब्ध कराया गया, लेकिन तस्वीरें दिखाई गईं।
निरीक्षण के बाद डॉ. द्विवेदी ने कहा कि भविष्य में अगर काशी खंडोक्त मूर्ति को हटाया जाए तो उसकी चालन पद्धति की वीडियोग्राफी कराई जाए। इसकी एक प्रति काशी विद्वत परिषद को भी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने दुर्मुख विनायक की मूर्ति को हटाने के दौरान पूजन करने वाले आचार्य डॉ. नीरज पांडेय और टेकनारायण से भी जानकारी ली। उन्होंने बताया कि दुर्मुख विनायक की मूर्ति सुरक्षित है और दोनों प्रहर पूजन किया जा रहा है।
परिषद के मंत्री ने मंदिर प्रशासन से कहा है कि भविष्य में किसी भी विग्रह को स्थानांतरित करने से पहले उन्हें इसकी जानकारी दी जाए। यह भी कहा कि मूर्तियों की स्थापना उसी स्थान पर उसी दिशा में मंदिर बनवाकर करवाई जाए। सोमवार को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने काशी विश्वनाथ धाम क्षेत्र में दुर्मख विनायक का मंदिर तोड़ने और मूर्ति गायब करने का आरोप लगाया था, जिसे मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिंह ने खारिज किया था। उन्होंने बताया कि मूर्ति को शास्त्रोक्त विधि से सुरक्षित रखा गया है। भविष्य में उसी स्थान पर दुर्मुख विनायक का बनेगा।
काशी विद्वत परिषद ने की बैठक
मूर्ति हटाने के मामले में काशी विद्वत परिषद की मंगलवार सुबह आनलाइन बैठक हुई। इसमें अध्यक्ष प्रो. रामयत्न शुक्ल, महामंत्री प्रो. शिवजी उपाध्याय, प्रो. वशिष्ठï त्रिपाठी, प्रो. रामचंद्र पांडेय के निर्देश पर मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी को निरीक्षण के लिए नामित किया गया। उधर, आचार्य वराहमिहिर ने शुभ मुहूर्त पर ही प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा कराने को कहा है।
प्राण प्रतिष्ठा और हटाने का विधान है समान
पद्मश्री महोमहापाध्याय भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी वागीश शास्त्री का कहना है कि मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के जो भी विधान हैं, वही हटाने के लिए भी करने होते हैं। वहीं, वास्तुशास्त्र के अनुसार, मंदिर में तोड़फोड़ नहीं करना चाहिए। इससे वास्तुभंग का दोष लगता है।