लहरतारा स्थित कबीर प्राकट्यस्थल पर उमड़े अनुयायी।
एकतारा, खझड़ी बजाकर नाचने, गाने वाले कबीर पंथियों का शुक्रवार को काशी में सैलाब उमड़ पड़ा। संत कबीर के पदों, भजनों की गूंज मच गई है। कबीर जयंती पर लहरतारा स्थित प्राकट्यस्थल पर तीन दिवसीय मेला गुलजार हो गया है। देश-दुनिया के कबीर पंथी हजूरी पंजे को धारण करने वाले संत-महंत भी पहुंचे हैं। सुबह संत कबीर के बाल रूप वाली प्रतिमा के दर्शन के साथ प्राकट्य स्थल पर कबीर के विचारों को दुनिया भर में फैलाने का संकल्प लिया गया।
लहरतारा के जिस तालाब में कभी बालक रूप में संत कबीर मिले थे, उसके जल से आचमन के लिए सुबह से ही अनुयायियों में होड़ मची रही। बड़ी तादात में लोग लहरतारा पहुंचे हैं। सुबह नौ बजे मंदिर में झंडारोहण आचार्य अर्धनाम साहेब ने किया। इसके बाद पूजा हुई। सत्संग में अर्धनाम साहेब ने कहा कि संत कबीर के विचारों को अपनाकर ही मानव का भला हो सकता है। धर्माधिकारी सुधाकर शास्त्री, महंत प्रेमदास साहेब, अंकित दास, नितिन भाई, सुनील दास शास्त्री, समेत तमाम संतों ने विचार व्यक्त किए। कबीर के पदों और भजनों की किताबों के स्टाल भी मंदिर परिसर में लगाए गए हैं।
उमरहां स्थित स्वर्वेद महामंदिर धाम परिसर में 19 और 20 जून को कबीर प्राकट्य महोत्सव और विहंगम योग समारोह आयोजित किया गया है। इस अवसर पर विभिन्न राज्यों से हजारों अनुयायी समारोह में शामिल होंगे। 19 जून को सुबह ध्वजारोहण कर कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। अगले दिन विश्व शांति महायज्ञ और प्रवचन तत्पश्चात् भंडारे का आयोजन किया गया है।