काशी में चित्रकूट भी है। क्वार की रामलीला के दौरान प्रतिवर्ष भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और सीता इस चित्रकूट में छह दिन प्रवास करते हैं। यहां बना पौराणिक कुंड बदहाल पड़ा है। कुंड में इस कदर गंदगी है कि लोग पानी का इस्तेमाल नहीं करते। 45 लाख रुपये की लागत से वीडीए ने इस कुंड का जीर्णोद्धार तो कराया लेकिन रखरखाव के अभाव में हालात जस के तस हो गए हैं। अब यहां नशेड़ियों की अड़ीबाजी होती है। अवांछनीय तत्वों का जमावड़ा होने की वजह से लीलास्थल से कुंड जाने वाले मार्ग को बंद कर दिया गया है।
चित्रकूट में भगवान का वास आज भी लोग मानते हैं। यह काशी का प्राचीन रामलीला स्थल भी है। माना जाता है कि तुलसी के शिष्य मेघा भगत को इसी स्थान पर भगवान राम ने कभी दर्शन दिया था। दंत कथाओं के अनुसार जब मेघा भगत चित्रकूट नहीं जा सके थे, तब भगवान राम ने सपने में उनको प्रेरणा दी कि तुम काशी में चित्रकूट की स्थापना कर लीला कराओ, मैं वहीं तुम्हें दर्शन दूंगा। इसी के बाद काशी में संत मेघा ने लीला की शुरुआत कराई।
चित्रकूट कुंड इसी लीला से जुड़ा पवित्र कुंड है, जिसे मेघा भगत ने खुदवाया था। इसी कुंड में भादों अनंत चतुर्दशी को रावण जन्म के बाद समुद्र मंथन की लीला होती है। भगवान विष्णु चित्रकूट कुंड में ही समुद्र मंथन करते हैं। इस लीला को देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ जुटती है। कालांतर में यह कुंड पट गया था लेकिन नागरिकों ने मुहिम चलाकर इसकी दोबारा खुदाई कराई। इस कुंड को पुनर्जीवित कराने में लोगों को कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ा था। इसके बाद वीडीए ने इसका कायाकल्प कराया। पक्की सीढ़ियां बनाई गईं। रेलिंग के साथ ही सुरक्षा दीवार और पाथवे का निर्माण कराया गया। अब नशेड़ी कुंड की रेलिंग काट ले जा रहे हैं। कुंड में कूड़ा-कचरा भर रहा है। पानी नहीं बदला गया और निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो इस कुंड की महिमा फिर से नष्ट हो जाएगी।