नगर के निजामुद्दीनपुरा में समाजसेवी पूनम पांडेय के अवास पर जूट से सामानों को बनातीं युवतियां।
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मऊ। अगर कोई कुछ कर गुजरने की ठान ले तो रास्ते मिल ही जाते हैं और मंजिल कदम चूमने लगती है। ऐसी ही हैं निजामुद्दीनपुरा की पूनम पांडेय जिन्होंने खुद जूट के स्वदेशी उत्पाद बनाकर न केवल खुद सफल हुई हैं, बल्कि साठ से अधिक महिलाओं को रोजगार देकर आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है।
पूनम पांडेय एमएससी बॉटनी के साथ बीएड, एमएड हैं। उनके पति सर्वेश पांडेय एसोसिएट प्रोफेसर हैं। स्वदेशी वस्तुओं के प्रति आकर्षित होने के कारण उन्होंने चार वर्ष पूर्व 2017 में शौक-शौक में जूट के विभिन्न उत्पाद बनाना शुरू किया। इनको पसंद किया जाने लगा तो उनके मन में विचार आया कि अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। सामाजिक कार्यों से जुड़े रहने के कारण वे स्वदेशी जागरण मंच की महिला प्रकोष्ठ से जुड़ीं। जूट से बने उत्पादों को देख पतिसर्वेश ने उनको स्वदेशी उद्यम को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया।
पूनम ने बताया कि पति तथा परिवार के लोगों के प्रोत्साहन पर उन्होंने अपने घर में कार्यालय बनवाया। यहां उन्होंने जूट से तैयार उत्पादों के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण देना शुरू किया। जूट से तैयार लैपटॉप बैग, आईपैड बैग, मोबाइल बैग आदि सामान को महिलाओं समेत हर वर्ग के लोगों ने पसंद किया। इनकी मांग बढ़ी तो उत्साह भी बढ़ गया। पूनम ने वर्ष 2017 से अब तक 60 से अधिक महिलाओं और युवतियों को मुफ्त प्रशिक्षण दिया, जो अब स्वरोजगार कर आत्मनिर्भर बन गई हैं। उन्होंने बताया कि कई सेमिनारों में कागज के बने फाइल कवर की जगह जूट से बने फाइल कवर को वरीयता मिल रही है। इसके अलावा विद्यालयों में आयोजित होने वाली प्रदर्शनी में बच्चे भी जूट से बने स्वदेशी उत्पाद के प्रति जागरूक हो रहे हैं।
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मुफ्त प्रशिक्षण के लिए लगाई गई हैं पांच मशीनें
पूनम ने बताया को महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके लिए पांच मशीनें लगाई गई हैं। प्रशिक्षण पूरा होने पर महिलाओं को रोजगार का अवसर भी दिया जाता है। यह महिलाएं प्रशिक्षण केंद्र में काम करती हैं।
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तीन से चार हजार रुपये की होती है आमदनी
जूट के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण लेकर स्वरोजगार कर रही महिलाओं को प्रति माह तीन से चार हजार रुपये की आय होती है। जूट से बने लैपटॉप बैग, मोबाइल बैग आदि की बिक्री के लिए स्वदेशी जागरण मंच की ओर से मेले का आयोजन विभिन्न स्थानों पर किया जाता है। मेले में अधिक सामान बिकने पर अधिक आय भी होती है।