यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि उस खेल के लिए संबंधित जिले में अनुकूल संसाधन हैं या नहीं। जौनपुर में एथलेटिक्स के प्रति शुरू से ही अच्छा रूझान रहा है। यहां के प्रमोद तिवारी हैमर थ्रो में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाते हुए लक्ष्मण पुरस्कार भी जीत चुके हैं।
जटाशंकर मिश्र को ओलंपिक में प्रतिनिधित्व का मौका मिला है तो प्रमोद के ही छोटे भाई अशोक भी हैमर थ्रो में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं। युवा खिलाड़ी रोहित यादव भी जेवलिन थ्रो के यूथ वर्ग में अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई मेडल लगातार जीत रहे। उनके पिता सभाजीत यादव मैराथन धावक के रुप में देश भर में खेल रहे हैं।
इन खिलाड़ियों से प्रेरणा लेकर अन्य खिलाड़ी भी इसी ओर आकर्षित हो रहे हैं। सिद्दीकपुर स्थित जिला स्टेडियम में रोजाना दौड़-कूद से जुड़े विभिन्न खेलों में अभ्यास करने वालों की बड़ी संख्या है। खिलाड़ियों के रुझान को देखते हुए ही एथलेटिक्स को जिले का प्रमुख खेल बनाने का प्रस्ताव शासन को प्रेषित किया गया है।
यह मिलेंगी सुविधाएं
एक जिला-एक खेल में चयन के बाद एथलेटिक्स के लिए संसाधनों की कमी नहीं होगी। खिलाड़ियों को अच्छे कोच मिलेंगे। पर्याप्त किट उपलब्ध होगा। मैदान की भी दशा भी सुधरेगी। अंतर्राष्ट्रीय मानक के अनुसार ही ग्राउंड तैयार कराया जाएगा। सिंथेटिक ट्रैक भी बनाए जाने की संभावना है। सबसे खास बात यह कि जिन छोटी-छोटी जरूरतों के लिए खिलाड़ियों को हर वर्ष बजट का इंतजार करना पड़ता था, उसके लिए बजट की कमी नहीं होगी।
एथलेटिक्स में शामिल हैं यह खेल
एथलेटिक्स प्रतिस्पर्धात्मक दौड़ने, कूदने, फेंकने और चलने की प्रतियोगिताओं का एक विशेष संग्रह है। एथलेटिक्स के अंतर्गत समान्य तौर पर ट्रैक और फील्ड, रोड रनिंग, क्रॉस कंट्री रनिंग और रेस वॉकिंग प्रतियोगिताओं को सम्मिलित किया जाता है। प्रतियोगिताओं की सादगी और महंगे उपकरणों की अनुपस्थिति, एथलेटिक्स को दुनिया की सबसे अधिक खेले जाने वाली खेल प्रतियोगिता बनाता है।
एथलेटिक्स के प्रति जिले में खिलाड़ियों का रुझान अच्छा है। यहां कई अच्छे खिलाड़ी भी रहे हैं। विभिन्न पहलुओं पर विचार के बाद इसे एक जिला-एक खेल में शामिल करने का प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्दी ही इसे मंजूरी भी मिल जाएगी। इसके बाद इस खेल से जुड़े खिलाड़ियों के लिए अवसर की कमी नहीं होगी। -नसरीन बानो, जिला खेल अधिकारी।