बीएचयू एम्फीथिण्टर मैदान में जाणता राजा के नाटक मंचन करते पुणे के कलाकार ।
- फोटो : रोहित सोनकर, संवाद
भारत की भूमि देवी देवताओं की भूमि है , वेद भी कहते हैं यंत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता।
भारतीय संस्कारों में स्त्री रूप सर्व प्रधान है इस पूरे महानाट्यमन्चन में जीजाबाई नाटक की ऐसी धुरी है जहां से शिवाजी महाराज को कूटनीति, युद्धनीति और पराक्रम की शिक्षा मिलती है। यह इस बात का संदेश है कि जिसने माता की पाठशाला में पढ़ाई की वह अपने जीवन काल में इतिहास रचने की ओर अग्रसर होगा। नाटक मानवीय संवेदनाओं को अपने में समेटे हुए है लेकिन माता की पाठशाला से ही शिवाजी यह सीखते हैं कि जिसने दुश्मनी कर ली हो उस पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए। भारत के विद्यार्थियों को राजपूत के मुसलमानों से युद्व में छह पराजय के कारण पढ़ाए जाते रहे हैं अगर वे छत्रपति के नीतियों का अनुसरण किए होते तो उन्हें पराजय का सामना नहीं करना पड़ा होता जिसकी भरपाई करने में देश की काफी बलिदान और भी चुकाने पड़े। आज भारत में हर युवा का आदर्श महाराणा प्रताप, छत्रपति शिवाजी, वीर बन्दा वैरागी और वीर सावरकर, मंगल पांडेय, चन्द्रशेखर आजाद होने चाहिए।
इस महानाट्यमन्चन ने पूर्वी उत्तर प्रदेश के माताओं ,बहनों, युवाओं और बालकों में राष्ट्रभक्ति के भाव को पहले उन्नत कर दिया है।लगभग 80 हजार लोगों ने 6 दिनों में महानाट्यमन्चन को देखकर यह साबित कर दिया है कि देश सर्वोपरि है ,दर्शकों ने तन मन और धन लगाकर महानाट्यमन्चन को देखा है।यह नाटक आने वाले समय उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व का ज्वार पैदा करेगा ऐसी उम्मीद है।