विशिष्ट अतिथि एनआईटी प्रयागराज के निदेशक प्रो. रमाशंकर वर्मा ने कहा कि हमें तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे संस्थान खड़े करने होंगे। नई शिक्षा नीति में ये खासियत है कि वह भारत के प्राचीन वैभव को लौटा सकती है।
कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि नई शिक्षा नीति से हमें अपनी ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाना होगा। स्वागत प्रो. बंशीधर पांडेय, संचालन डॉ. आरती विश्वकर्मा और धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव हरीशचंद ने किया। इस दौरान नैक के पूर्व निदेशक प्रो. एएन राय, बीएचयू के डॉ. आलोक गाडिया, डॉ. धनंजय विश्वकर्मा ने विचार व्यक्त किए।