बीएचयू के प्राचीन इतिहास, पुरातत्व विभाग में हुई कार्यशाला में वक्ताओं ने उत्तर-मौर्यकालीन मुद्राशास्त्र और धरोहर के बारे में चर्चा की। विभागाध्यक्ष प्रो. एमपी अहिरवार ने कहा कि स्मारकों, सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना जरूरी है।
प्राचीन इतिहास विभाग में सात दिवसीय हैंडस-आन कार्यशाला में भारतीय ज्ञान परंपरा के परिपेक्ष्य में प्राचीन भारतीय मुद्राओं, उसके स्रोत, लिपि और टकसाल तकनीक पर चर्चा की गई। तीसरे दिन का मुख्य फोकस उत्तर-मौर्यकालीन मुद्राओं पर रहा। इसमें नगर-निर्गत सिक्के, राजशाही सिक्के, जनजातीय मुद्राएं शामिल रही। इसमें आए प्रतिभागियों ने भारत कला भवन का भ्रमण कर यहां रखे कुषाण एवं गुप्तकालीन सिक्कों के महत्वपूर्ण संग्रह को देखा। धरोहर दिवस पर प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर दीप्ती श्रीवास्तव, द्वितीय स्थान सुजीत यादव, तृतीय स्थान पर निहारिका सिंह, संजना सिंह रही। कार्यक्रम में कार्यशाला की संयोजिका प्रो. मीनाक्षी सिंह ने प्रतिभागियों को प्राचीन भारतीय मुद्राशास्त्र के साथ-साथ सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण के प्रति जागरूक किया।