महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के विधि विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल ने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी को सशक्त करने वाला ऐतिहासिक कदम है। इसके महत्व को समझना होगा। कार्यक्रम में न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल ने कहा कि यह अधिनियम लोकतंत्र में समान प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम समाज में विधिक समझ और सांविधानिक मूल्यों के प्रसार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बीएचयू समाजशास्त्र विभाग की प्रो. श्वेता प्रसाद ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों की वास्तविक स्थापना के लिए सामाजिक मानसिकता में बदलाव जरूरी है। कहा कि नारी आंदोलन के विभिन्न चरणों के परिणामस्वरूप नारी सशक्तीकरण की प्रबल नींव विकसित हुई। आज इसी आंदोलन का परिणाम है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम और महिला आरक्षण पर एक सार्थक पहल समाज व सरकार की ओर से हुई है, जो कि स्वागतयोग्य है। कार्यक्रम में विधि विभाग की डाॅ. शिल्पी गुप्ता की संपादित आईसीएसएसआर परियोजना पुस्तक का विमोचन अतिथियों ने किया। स्वागत संकायाध्यक्ष और विभागाध्यक्ष प्रो. रंजन कुमार, संचालन डॉ. शिल्पी गुप्ता और धन्यवाद ज्ञापन कुलसचिव डॉ. सुनीता पांडेय ने किया।