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IIT BHU दीक्षांत समारोह: किसी को मिले सात मेडल तो किसी को छह, बोले- 'ऐसा काम करना है जिससे दूसरों को जॉब मिले'

Sat, 07 Oct 2023 03:05 PM IST
किरन रौतेला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

कोई भी काम को मन से करने से उसके सकारात्मक परिणाम जरूर मिलते हैं। पढ़ाई मन से की और नियमित की। इसी का परिणाम सात मेडल के तौर पर मिला। माइक्रोटेक में साफ्टेवयर इंजीनियर हूं। लेकिन, खुद का स्टार्ट अप शुरू करना है। पिता आंध्र प्रदेश में शिक्षक हैं और मां गृहिणी
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मेडल पाकर चमके चेहरे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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गले में लटके गोल्ड मेडल और खुशी से दमकते मेधावियों के चेहरे। आईआईटी बीएचयू के दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल पाने वाले उत्साहित अधिकतर मेधावियों ने कहा कि अनुभव के लिए जॉब जरूरी है, लेकिन हमें ऐसा बनना है कि हम दूसरों को जॉब दे सकें। खुद का स्टार्टअप शुरू कर दूसरों काे नौकरी देने पर ही आगे का लक्ष्य होगा। किसी ने सात मेडल तो किसी छह व पांच मेडल पाकर अपनी योग्यता साबित की।

कक्षा में नियमित पढ़ाई और अतिरिक्त शोध पर पूरा ध्यान रहा। इसी की बदौलत अच्छा कर पाया। छह गोल्ड मेडल मिला। वर्तमान में पिरामल फाइनेंस बंगलूरू में साॅफ्टवेयर इंजीनियर हूं। माता-पिता दोनों ही शिक्षक हैं। आगे खुद का बिजनेस भी करना है ताकि दूसरों को नौकरी दे सकूं। -आर्यन जासवाल

 

 

 

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गोल्ड मेडल के साथ । इवुरी हरीश - फोटो : अमर उजाला
कोई भी काम को मन से करने से उसके सकारात्मक परिणाम जरूर मिलते हैं। पढ़ाई मन से की और नियमित की। इसी का परिणाम सात मेडल के तौर पर मिला। माइक्रोटेक में साफ्टेवयर इंजीनियर हूं। लेकिन, खुद का स्टार्ट अप शुरू करना है। पिता आंध्र प्रदेश में शिक्षक हैं और मां गृहिणी। -इवुरी हरीश।

चार गोल्ड मेडल मिला तो इसका श्रेय माता-पिता और गुरुजनों को जाता है। यह सब उनके आशीर्वाद से ही संभव हो पाया। नोएडा में माइक्रोटेक कंपनी में साॅफ्टवेयर इंजीनियर हूं, लेकिन आने वाले समय में खुद का स्टार्टअप शुरू करूंगा, ताकि दूसरों को रोजगार दे सकूं। - अपूर्व जैन

 

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IIT-BHU के 12वें दीक्षांत समारोह - फोटो : अमर उजाला

नियमित पढ़ाई और रिसर्च ने काम आसान किया। पांच गोल्ड मेडल का श्रेय परिजनों और संस्थान के गुरुजनाें को जाता है। बंगलूरू में हार्डवेयर इंजीनियर हूं, आने वाले समय में कुछ ऐसा करने की चाहत है कि अधिक से अधिक लोगों को रोजगार दे सकूं। पापा छपरा में प्रोफेसर है। - दिव्यांश चंद्र राॅय

यह लम्हा जीवन में कभी भूलेगा नहीं। दीक्षांत समारोह में मंच पर चार गोल्ड मेडल पाने का सपना पूरा हुआ। इसके लिए दिन और रात मेहनत किया था। अलग से रिसर्च डेवलपमेंट पर फोकस किया। पिता प्रोफेसर हैं। - देशमुख शुभम हेमचंद्रन

पढ़ाई पूरी होने के बाद इस समय बंगलूरू में साॅफ्टवेयर इंजीनियर हूं। पांच मेडल पाने का श्रेय परिजनों और गुरुजनों को जाता है। अब आगे प्रशासनिक सेवाओं में जाने का मन है। ओडिशा में पिता रेलवे में कार्यरत हैं। मां घर संभालती हैं। - शाश्वत

 

मेडल पाने का यह ऐतिहासिक पल काफी भावुक करने वाला रहा। इस समय बंगलूरू की एक कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं। आगे एमबीए करने का इरादा है। परिवार मुंबई के गोरेगांव में है। - हर्षिता।

मेहनत खूब की थी लेकिन पांच मेडल मिलेंगे, ये कभी नहीं सोचा था। यह उपलब्धि परिवार और आईआईटी के शिक्षकों की बदौलत मिली है। बंगलूरू में साॅफ्टेवयर इंजीनियर हूं। आगे कुछ और बड़ा करने का इरादा है। पिता राजस्थान के सिक्कर में फाइनेंस एडवाइजर हैं। - प्रज्ञा, आईआईटी बीएचयू

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