एशिया कप में टीम इंडिया के खेल चुके है अजय
एशिया कप में टीम इंडिया के लिए खेल चुके विशेश्वरगंज निवासी अजय यादव ने दिव्यांगता को अभिशाप बनने नहीं दिया। वाराणसी विकास भवन के पंचायती राज विभाग में कार्यरत अजय क्रिकेट में अपना मुकाम बना चुके हैं। 14 साल की उम्र में एक घटना ने उन्हें दिव्यांग बना दिया। दाहिना पैर खराब होने की वजह से वह छह साल तक बिस्तर पर ही रहे।
अजय यादव
बचपन से ही क्रिकेट के दीवाने अजय के लिए खेलना तो दूर, चलना भी मुश्किल हो चुका था। अजय ने 1996 में यूपी में सबसे पहले दिव्यांग क्रिकेट की शुरुआत की। 2012 में अजय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले यूपी के पहले दिव्यांग क्रिकेटर बने। 2012 में अजय पाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ क्रिकेट सीरीज, 2015 में भारत-साउथ अफ्रीका टी-20 सीरीज भी खेल चुके हैं।
स्पेशल ओलंपिक में रुद्राक्ष ने जीता स्वर्ण
जन्म से ही डाउन सिंड्रोम बीमारी से ग्रसित सुंदरपुर निवासी चंद्रकला रावत और जितेंद्र सिंह के बेटे रुद्राक्ष अहमदाबाद में आयोजित स्पेशल ओलंपिक भारत में स्वर्ण पदक जीतकर काशी का मान बढ़ाया है। इसके पहले भी उन्होंने विशिष्ट बच्चों के लिए आयोजित जिला एवं राज्य स्तर एवं राष्ट्रीय स्तर पर बॉस्सी खेल में स्वर्ण पदक जीत चुके है।
रुद्राक्ष
12 वर्षीय रुद्राक्ष देवा इंटीग्रेटेड स्कूल फार हैंडीकैप में पढ़ाई करते हैं। 2016 एवं 2018 में जिला और राज्य स्तरीय खेलों में उन्होंने साफ्ट बॉल थ्रो में स्वर्ण, स्टैंडिंग लांग जंप में स्वर्ण और 25 मीटर रेस में रजत पदक जीत चुके हैं। रुद्राक्ष की मां चंद्रकला रावत स्पेशल ओलंपिक भारत में कोच हैं। फरवरी 2019 में पीएम के वाराणसी दौरे में रुद्राक्ष प्रधानमंत्री मोदी से भी मिल चुके हैं।
पैराओलंपिक में जीता कांस्य पदक
कमच्छा निवासी मदन मोहन मिश्रा की पोती निधि मिश्रा दृष्टि बाधित हैं। बावजूद इसके वह जेएनयू में पीएचडी की स्कालर हैं और 2018 में जकार्ता में हुए एशियाई पैरा खेल में देश का परचम लहरा चुकी हैं। यह उनके परिश्रम का ही फल है कि उन्होंने महिला डिस्कट थ्रो एफ 11 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता है। निधि ने दिल्ली विश्वविद्यालय से से स्नातक किया है।
पीएम मोदी के साथ निधि मिश्रा
2010 से निधि ने खेलना शुरू किया और अब तक विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 100 मीटर दौड़, डिस्कस थ्रो और शॉटपुट में कई पदक अपने नाम कर चुकी हैं। फरवरी 2018 में दिल्ली की पैरालंपिक समिति की ओर से आयोजित 10वीं दिल्ली स्टेट एथलीट, पावर लिफ्टिंग एवं टेबल टेेनिस प्रतियोगिता में उन्होंने तीन स्वर्ण पदक जीते। निधि का अब पूरा ध्यान 2020 में टोक्यो में होने वाले ओलंपिक पर है।
रंगों से रोशन से किया जीवन
सोनू पैरों से चल नहीं सकते, तो उन्होंने अपने हाथों के हुनर को अपनी ताकत बना ली। आज सोनू को उनकी पेंटिंग के लिए भारत सरकार के सांस्कृतिक एवं प्रशिक्षण केंद्र द्वारा ‘यंग आर्टिस्ट अवार्ड इन द फील्ड ऑफ विजुएल आर्ट’ का अवार्ड प्रदान किया जा चुका है। वर्तमान में सोनू बीएचयू दृश्य कला संकाय में परास्नातक के छात्र हैं।
सोनू
सोनू की कला के लिए उन्हें क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी की ओर से आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम स्थान मिला और उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय की ओर से प्रेम कुमार स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। स्वीप द्वारा राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में प्रथम आने के साथ ही बीएचयू पैराओलंपिक खेलों में भी पुरस्कार प्राप्त कर चुके है।
अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस तीन दिसंबर को मनाया जाता है। जिसका उद्देश्य आधुनिक समाज में शारीरिक रूप से अक्षम लोगों के साथ हो रहे भेद-भाव को समाप्त किया जाना है। जिसकी स्वीकृति संयुक्त राष्ट्र संघ ने तीन दिसंबर 1991 से प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस को मनाने की स्वीकृति प्रदान की थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1981 को अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस के रूप में घोषित किया था।