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अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस: काशी की गलियों से निकलकर विश्व फलक पर छाया बनारस घराने का कथक

Fri, 29 Apr 2022 03:47 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

नृत्य अब सिर्फ कला नहीं लोगों की जरूरत बन गया है पहले जहां इसे सिर्फ एक कला के रूप में देखा जाता वहीं अब यह फिटनेस मंत्र के रूप में देखा जा रहा है बच्चों और किशोरियों के अलावा अब महिलाओं में नृत्य का चलन बढ़ गया है। 
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सितारा देवी ने कथक को दुनिया भर में चमकाया - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वाराणसी के कबीरचौरा की पद्मगली से निकलने वाली घुंघरूओं की झंकार गर्मी में भी राहत की फुहार बरसा रही थी। ता ता थैय्या की तत्कार पर कथक की भाव भंगिमाओं को नन्हे कलाकार उकेर रहे थे। कथक गुरु पं. रविशंकर मिश्र के गुरुकुल में कथक के संस्कारों को सींचा जा रहा है। गरमी ज्यादा होने के कारण तड़के सुबह और धूप ढलने के बाद रोजाना अभ्यास की प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

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अंतरराष्ट्रीय नृत्य दिवस की पूर्व संध्या पर जब अमर उजाला की टीम पं. रविशंकर मिश्र के आवास पर पहुंची तो सन्नाटा पसरा हुआ था। कुछ ही देर बाद शिष्यों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। कोई पैरों में घुंघरू बांध रहा था तो कोई संगीत की तान पर मुद्राओं को साध रहा था। इसके बाद शुरू हुआ प्रशिक्षण का सिलसिला। ता ता थैय्या... पर सधे हुए कदमों से बच्चों ने जब नृत्य की शुरूआत की तो संगीत के सुरम्य वातावरण ने सम्मोहन सा कर दिया। 

कथा करता है वह कथक
कथक गुरु पं. रविशंकर मिश्र ने बताया कथा करोति कथक अर्थात जो कथा करता है वह कथक है। तबले या पखावज की संगत के साथ नर्तक ठाट, तोड़े, परन, टुकड़े के साथ अभिनय एवं भाव से कला को प्रस्तुत करता है। नृत्य के दौरान पैरों में बंधे घुंघरूओं से जो ध्वनि की उत्पत्ति होती है उसे तत्कार कहते हैं। पं. रविशंकर मिश्र ने बताया कि बनारस घराने के युवा विशाल कृष्ण, गौरव-सौरव मिश्र, रुद्रशंकर नृत्य की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं।

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गुरु और दादी की परंपरा को आगे बढ़ा रहे विशाल

कथक विधा से जुड़े गौरव-सौरभ मिश्र - फोटो : amar ujala
कथक के बनारस घराने के गुरु पांडेय महाराज के पौत्र और सितारा देवी के शिष्य विशाल अपने गुरु से प्राप्त थाती को सहेजने के साथ नई पीढ़ी में कथक के संस्कार डालकर एक नई पौध तैयार कर रहे हैं। विशाल ने अपने नृत्य के जरिए भारत के विभिन्न राज्यों ही नहीं विदेशों में भी कृष्ण रूप को प्रस्तुत कर चुके है। इसके  साथ ही विशाल छोटे पर्दे के रियलिटी शो में भी हिस्सा लेकर अपने नृत्य के जरिए पहचान बना चुके हैं। विशाल ने बॉलीवुड अभिनेत्री हेमा मालिनी के साथ भी कई कार्यक्रमो में संगत कर चुके हैं।

काशी की धन्नो से कथक क्वीन तक का सफर

कथक नृत्य प्रस्तुत करते विशाल कृष्णा - फोटो : अमर उजाला
काशी की गलियों में रहने वाली धन्नो को पूरी दुनिया कथक क्वीन सितारा देवी के नाम से जानती है। 16 साल की उम्र में सितारा देवी का नित्य देखकर गुरु रविंद्र नाथ टैगोर ने उन्हें कथक क्वीन का खिताब दिया था। कथक को विश्व फलक तक पहुंचाने का श्रेय सितारा देवी को ही जाता है। नृत्य  प्रतिभा की बदौलत ही छोटी उम्र में सितारा देवी को फिल्मों में काम करने का मौका मिला। मुंबई के बिरला मातोश्री हॉल में बनाया गया रिकॉर्ड उनके जीवन की बेहतरीन पूंजी थी। सितारा देवी ने वहां लगातार 12 घंटे तक नृत्य किया था।
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खुद को फिट रखने का जरिया बना नृत्य

प्रख्यात कथक नृत्य गुरु पंडित बिरजू महाराज - फोटो : अमर उजाला
नृत्य अब सिर्फ कला नहीं लोगों की जरूरत बन गया है पहले जहां इसे सिर्फ एक कला के रूप में देखा जाता वहीं अब यह फिटनेस मंत्र के रूप में देखा जा रहा है बच्चों और किशोरियों के अलावा अब महिलाओं में नृत्य का चलन बढ़ गया है। कोरोना काल के दौरान महिलाओं ने खुद को फिट रखने के लिए जुम्बा डांस का सहारा लिया था। निजी डांस एकेडमी में आने वाले डांस स्टूडेंट्स में करीब 40 प्रतिशत महिलाएं हैं।

बनारस घराने के प्रमुख सितारे
सितारा देवी, बिरजू महाराज, लच्छू महाराज, सुखदेव महाराज, गोपीकृष्ण, शोभना नारायण, मालविका सरकार, चंद्रलेखा, बिंदादिन महाराज, अच्छन महाराज
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