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वाराणसी-मिर्जापुर के बीच बनेगा इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर

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ईज ऑफ डुईंग बिजनेस के तहत वाराणसी में औद्योगिक इकाइयां लगाने के लिए बाहर के उद्यमी और निवेशक बेकरार है लेकिन जमीन नहीं मिलने के कारण निराशा हाथ लग रही है। कई सरकारी परियोजनाओं के लिए भी जमीन पिछले साल भर से जमीन की तलाश हो रही है। लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही है।
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इस कारण परियोजनाएं लेटलतीफी की शिकार हो रही हैं तो कई निवेशक दूसरे जनपदों में इकाइयां लगाने को बाध्य हो रहे हैं। इस समस्या से उद्यमियों को निजात दिलाने के लिए जिला उद्योग व प्रोत्साहन केंद्र ने वाराणसी-मिर्जापुर के बीच इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। शासन की सहमति पर प्रस्ताव में वाराणसी से मिर्जापुर के बीच उद्यमियों को सस्ती व सुलभ जमीनें उपलब्ध कराई जाएंगी।
उद्योग अधिकारियों के अनुसार वाराणसी में भूमि मिल नहीं रही और उपलब्ध भी हो रही हैं तो कीमतें अधिक होने के चलते उद्यमी किनारा कर ले रहे हैं। मिर्जापुर व सोनभद्र में पर्याप्त जमीनें हैं। वाराणसी से मिर्जापुर के बीच इंडस्ट्रीयल कॉरिडोर बनाया जाएगा। इससे उद्यमियों की इकाइयों के लिए भूमि आसानी से मिल सकेगी। इसका केंद्र भी वाराणसी ही रहेगा। प्रस्ताव पर मुहर लगने के बाद सर्वे कराया जाएगा कि रामनगर क्षेत्र या फिर राजातालाब हाईवे क्षेत्र से मिर्जापुर के लिए कॉरिडोर बनाया जाए।
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कॉरिडोर बनने के बाद औद्योगिक इकाइयों के लिए जितनी भूमि की आवश्यकता होगी, वह मिल सकेगी। वाराणसी के मुकाबले मिर्जापुर में जमीन 15 से 20 प्रतिशत तक सस्ती है। कॉरिडोर में मिर्जापुर का 90 फीसदी भाग और वाराणसी का 10 फीसदी भाग शामिल रहेगा। हालांकि अंतिम फैसला विशेषज्ञों को लेना है।
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बढ़ेंगी इकाइयां, मिलेगा रोजगार
भूमि की उपलब्धता नहीं होने के कारण कई इकाइयां स्थापित नहीं हो पा रही हैं। जब कॉरिडोर बनेगा तो आसानी से भूमि की उपलब्धता होगी और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मुहैया होगा। कॉरिडोर से इकाइयों का जाल फैलेगा।
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कॉरिडोर का केंद्र होगी काशी
कॉरिडोर में जो भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, उससे संबंधित कार्य को वाराणसी क्षेत्र से किया जा सकेगा। मसलन, उद्यमियों को कहीं ज्यादा भाग-दौड़ करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। इसके साथ ही कॉरिडोर को विस्तारित करते हुए सोनभद्र और भदोही से भी आगे चलकर जोड़ने पर मंथन किया जाएगा।
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केस-एक
राजातालाब में बीयर की फैक्ट्री के लिए लगभग एक एकड़ भूमि की तलाश साल भर से चल रही थी। काफी तलाश के बाद जब भूमि नहीं मिली तो सोनभद्र में बीयर की फैक्ट्री चली गई। सोनभद्र में उद्यमी को आसानी से जमीन मिल गई।
केस-दो
शिवपुर क्षेत्र में दो हेक्टेयर भूमि में 550 करोड़ के अस्पताल का प्रोजेक्ट दो साल से भूमि के अभाव में लटका हुआ है। काफी प्रयास के बाद भी जमीन नहीं मिल पा रही है।
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वाराणसी से मिर्जापुर को जोड़ने वाले मार्ग के बीच कॉरिडोर बनाया जाएगा, ताकि उद्यमियों को आसानी से भूमि मिल सके। इस समय जमीन के अभाव में कई परियोजनाएं भी लंबित हैं। कॉरिडोर के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है।
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- वीरेंद्र कुमार, उपायुक्त उद्योग।
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