ललिता घाट का ऐतिहासिक पशुपति नाथ मंदिर
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श्री काशी विश्वनाथ कॉरिडोर एवं गंगा पाथवे की जद में आने वाले भवनों, इमारतों, मंदिरों में ललिता घाट का ऐतिहासिक पशुपति नाथ मंदिर भी आ सकता है।हालांकि अभी योजना का ब्ल्यूप्रिंट सामने नहीं आया है लेकिन मंदिर के योजना के दायरे में आने की चर्चाओं से श्रद्धालु आहत हैं और विरोध का दौर भी शुरू हो गया है।
काशी में रहने वाले नेपाली समुदाय के साथ ही आम श्रद्धालु चाहते हैं कि मंदिर के स्वरूप से किसी तरह की कोई छेड़छाड़ न किया जाए। 17 वीं सदी का यह मंदिर लाखों भारतीयों-नेपालियों की आस्था और मैत्री का प्रतीक है।
17वीं सदी में नेपाल के तत्कालीन महाराजा ने इस मंदिर का निर्माण शुरू कराया था। मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहां काठमांडू स्थित पशुपतिनाथ महादेव का अंश है और इसे नेपाली खजुराहो मंदिर के नाम से भी जाना जाता है।
मंदिर के कॉरिडोर के दायरे में आने की चर्चाओं के बीच धरोहर बचाओ समिति ने प्रशासन के रवैए पर कड़ी नाराजगी जताई है। समिति का आरोप है कि प्राचीनतम नगरी काशी का जो आर्किटेक्ट है, उसे खत्म करने की साजिश रची जा रही है। उधर, नेपाली समुदाय भी आहत है।