काशी विद्यापीठ में देश का पहला म्यूजिक थेरैपी लैब शुरू
- फोटो : अमर उजाला
केंद्र से प्रशिक्षित होकर निकले विद्यार्थी विभिन्न क्षेत्रों में परामर्श देंगे। इन केंद्रों का समन्वयन डॉ. मुकेश कुमार पंथ और डॉ. दुर्गेश कुमार उपाध्याय करेंगे। कुलपति प्रो. एके त्यागी ने दोनों प्रकोष्ठ का फीता काटकर विधिवत उद्घाटन किया। इस दौरान कुलसचिव हरीश चंद, परीक्षा नियंत्रक प्रो. बंशीधर पांडेय, कुलानुशासक प्रो. अमिता सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. रश्मि सिंह, प्रो. शेफाली वर्मा ठकराल मौजूद रहीं।
संगीत केवल मन को ही सुकून नहीं देता है, तन और मन के रोगों को भी दूर करता है। इसमें हर राग का अपना अलग-अलग महत्व है। सुबह के समय राग भैरवी, दोपहर में तोड़ी और शाम को राग जय-जयवंती का अलग ही प्रभाव है।
काशी विद्यापीठ में देश का पहला म्यूजिक थेरैपी लैब शुरू
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विभागाध्यक्ष प्रो. रश्मि सिंह ने बताया कि संगीत से रक्तचाप, दिल की बीमारियों, थकान और तनाव में राहत के साथ-साथ एकाग्रता भी बढ़ती है। हर राग, ताल और संगीत में रोग को मिटाने की क्षमता होती है। यदि रात में नींद न आए तो मधुर संगीत सुनें। केंद्र में मरीजों का इलाज विशुद्ध शास्त्रीय संगीत, उपशास्त्रीय संगीत और लोक संगीत के साथ ही बॉलीवुड के शास्त्रीय रागों पर आधारित संगीत से किया जाएगा।
राग और इलाज
- पूरिया धनाश्री- अनिद्रा
- मालकौंस- तनाव
- शिवरंजनी-मन को सुखद अनुभूति
- मोहिनी- आत्मविश्वास बढ़ाता है
- भैरवी- ब्लड प्रेशर और तंत्रिका तंत्र पर नियंत्रण
- पहाड़ी-स्नायु तंत्र को बेहतर
- दरबारी कान्हड़ा- तनाव दूर
- अहीरभैरव व तोड़ी- उच्च रक्तचाप
- कान्हड़ा- अस्थमा
- भैरवी- साइनस
- तोड़ी-सिरदर्द व क्रोध
शासन ने सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के तहत काशी विद्यापीठ के मनोविज्ञान विभाग में म्यूजिक थेरेपी सेल एंड रिसर्च सेंटर के शुरुआत के लिए मंजूरी दी थी। म्यूजिक थेरेपी और शोध केंद्र के लिए शासन ने 5.40 लाख का बजट भी जारी किया था।