वाराणसी और कानपुर में बरामद रुपये और अन्य सामान
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पकड़े गए जितेंद्र ने बताया कि वह कानपुर में ही दो ऑनलाइन बेटिंग बॉक्स रखा था। हर बेटिंग बॉक्स से 10 बुकी माइक और स्पीकर के जरिए ऑनलाइन सट्टा लगाते है। इस बॉक्स में बुकी की बातें भी रिकॉर्ड करने की व्यवस्था है।
जितेंद्र ने बताया कि कभी-कभी सट्टा लगाने के दौरान विवाद की स्थिति में बुकी की रिकॉर्ड की गई बातों को सुनाकर मामले को सुलझाया जाता है। जितेंद्र ने लैपटॉप में ऑरेंज नामक ऑनलाइन एप डाउनलोड कर रखा था, जिससे उसे इंडियन टी20 लीग खेले जाने वाले हर खेल के भाव (रेट) की जानकारी होती थी।
इसके बाद जितेंद्र प्रदेश भर में फैले अपने एजेंट को व्हाट्सएप के माध्यम से वॉयस कॉल कर के भाव की सूचना देता था। जितेंद्र के तार प्रदेश और देश के बाहर रायपुर, अजमेर, जयपुर, मुंबई, दिल्ली और दुबई के बुकी से जुड़े है। वहीं, उत्तर प्रदेश में कानपुर, लखनऊ, फतेहपुर, वाराणसी, प्रयागराज आदि जिलों में भी जितेंद्र ने अपना जाल बिछा रखा है।
वाराणसी और कानपुर में सट्टेबाजी के सरगना के पास से बरामद कारें
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पुलिस का कहना है कि ये बुकी इतने शातिराना तरीके से सट्टेबाजी करते है कि इनकी आय और फोन का कोई रिकॉर्ड नहीं मिल पाता है। सट्टेबाजी में मिलने वाले रुपये का लेनदेन ये गुप्त तरीके से करते हैं। सट्टेबाजी के लिए व्हाट्सएप से वॉयस कॉल का इस्तेमाल करते हैं, क्योंकि पुलिस व्हाट्सएप कॉल को जल्दी ट्रेस नहीं कर पाती है।
बुकी जितेंद्र ने ये काम कई सालों तक दुबई में रह कर किया है। भारत वापस आने के बाद जितेंद्र ने ऑनलाइन सट्टेबाजी का धंधा शुरू कर दिया। जीतू के मुंबई, कानपुर, लखनऊ, फतेहपुर में खरीदे हुए कई मकानों का भी ब्योरा पुलिस को मिला है।