फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Indian Air Force Day: शहीद को भूल गई सरकार, दो साल बाद भी न तो मूर्ति लगी, न ही बन पाई सड़क, डिप्टी सीएम भी पहुंचे थे घर

Fri, 08 Oct 2021 10:13 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

17 फरवरी 2019 को श्रीनगर में पेट्रोलिंग के दौरान वायुसेना का हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था और वाराणसी निवासी पायलट विशाल पांडेय शहीद हो गए थे।  ,
विज्ञापन
शहीद विशाल पांडेय के माता-पिता - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पड़ोसी पूछते हैं कि पांडेय जी, शहीद विशाल की मूर्ति कब लगेगी। उनके नाम से सड़क बनेगी या नहीं। गेट का नाम भी विशाल के नाम पर रखा जाना था। यह सब कब होगा। इन प्रश्नों पर एकदम निरुत्तर हो जाता हूं। पिछले डेढ़ साल से गुहार लगाकर थक गया हूं। दौड़ भाग के दौरान मंत्री, विधायक आश्वासन की घुट्टी पिलाते हैं।

विज्ञापन


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसंपर्क कार्यालय में भी कई बार पत्र दिया, लेकिन अब तक किसी ने कोई सुध नहीं ली। यह दर्द है वायुसेना में सार्जेंट रहे शहीद विशाल पांडेय के पिता विजय शंकर पांडेय का। यह कहते हुए वाराणसी के हुकुलगंज में रहने वाले विजय शंकर पांडेय की आंखें भर आईं। कुछ क्षण के लिए लब खामोश हो गए और लंबी सांस खींचते हुए उन्होंने कहा कि अब सब ईश्वर के आसरे छोड़ दिया है।
पढ़ेंः आरटीआई एक्टिविस्ट ने काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन से मांगा दान-दक्षिणा और चढ़ावे का ब्यौरा, जवाब मिला- गूगल पर खोज लो
विज्ञापन


रोहनिया के कुरूहुआं के काशीपुर गांव निवासी विजय शंकर पांडेय का परिवार पिछले छह साल से हुकुलगंज में रह रहा है। 17 फरवरी 2019 को श्रीनगर में पेट्रोलिंग के दौरान वायुसेना का हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था और  पायलट विशाल पांडेय शहीद हो गए थे।

शहीद की पत्नी को नौकरी मिली मगर...

शहीद विशाल पांडेय - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ विशाल का शव बनारस लाया गया। पत्नी माधवी को लखनऊ में सरकारी नौकरी मिली और सेना की ओर से बड़ी धनराशि भी मिली। हालांकि इसके बाद से माधवी शहीद विशाल के माता-पिता से संपर्क में नहीं है।
विज्ञापन

सिर्फ टेबल से टेबल घूम रही है फाइल

पिता विजय शंकर पांडेय ने बताया कि स्मारक और मूर्ति बनवाने की फाइल सिर्फ टेबल-टेबल घूम रही है। नवंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय से पत्र मांगा गया था। इसके बाद गांव में स्मारक, सड़क और गेट बनवाने का पत्र सीडीओ, सीआरओ, डीडीओ, एडीएम कार्यालय से होते हुए पर्यटन विभाग तक पहुंचा। अधिकारियों से बीच में वार्ता हुई तो पता चला कि लखनऊ में पत्र भेजा जा चुका है।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें