पड़ोसी पूछते हैं कि पांडेय जी, शहीद विशाल की मूर्ति कब लगेगी। उनके नाम से सड़क बनेगी या नहीं। गेट का नाम भी विशाल के नाम पर रखा जाना था। यह सब कब होगा। इन प्रश्नों पर एकदम निरुत्तर हो जाता हूं। पिछले डेढ़ साल से गुहार लगाकर थक गया हूं। दौड़ भाग के दौरान मंत्री, विधायक आश्वासन की घुट्टी पिलाते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसंपर्क कार्यालय में भी कई बार पत्र दिया, लेकिन अब तक किसी ने कोई सुध नहीं ली। यह दर्द है वायुसेना में सार्जेंट रहे शहीद विशाल पांडेय के पिता विजय शंकर पांडेय का। यह कहते हुए वाराणसी के हुकुलगंज में रहने वाले विजय शंकर पांडेय की आंखें भर आईं। कुछ क्षण के लिए लब खामोश हो गए और लंबी सांस खींचते हुए उन्होंने कहा कि अब सब ईश्वर के आसरे छोड़ दिया है।
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रोहनिया के कुरूहुआं के काशीपुर गांव निवासी विजय शंकर पांडेय का परिवार पिछले छह साल से हुकुलगंज में रह रहा है। 17 फरवरी 2019 को श्रीनगर में पेट्रोलिंग के दौरान वायुसेना का हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था और पायलट विशाल पांडेय शहीद हो गए थे।
शहीद की पत्नी को नौकरी मिली मगर...
शहीद विशाल पांडेय
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद राजकीय सम्मान के साथ विशाल का शव बनारस लाया गया। पत्नी माधवी को लखनऊ में सरकारी नौकरी मिली और सेना की ओर से बड़ी धनराशि भी मिली। हालांकि इसके बाद से माधवी शहीद विशाल के माता-पिता से संपर्क में नहीं है।
सिर्फ टेबल से टेबल घूम रही है फाइल
पिता विजय शंकर पांडेय ने बताया कि स्मारक और मूर्ति बनवाने की फाइल सिर्फ टेबल-टेबल घूम रही है। नवंबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय कार्यालय से पत्र मांगा गया था। इसके बाद गांव में स्मारक, सड़क और गेट बनवाने का पत्र सीडीओ, सीआरओ, डीडीओ, एडीएम कार्यालय से होते हुए पर्यटन विभाग तक पहुंचा। अधिकारियों से बीच में वार्ता हुई तो पता चला कि लखनऊ में पत्र भेजा जा चुका है।