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भारत अधिकार प्रधान नहीं, कर्तव्य प्रधान देश

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उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एवं बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि देश ने 700 सालों तक पराधीनता के संघर्ष को झेला है। भारत ही वह देश है जहां शाश्वत सनातन मूल्य स्थापित हुआ, हार और जीत महत्वपूर्ण नहीं है हम किस बात के लिए संघर्ष कर रहे हैं यह महत्वपूर्ण है। सर्वे भवंतु सुखिन: हमारा विचार है। वास्तव में भारत अधिकार प्रधान नहीं बल्कि कर्तव्य प्रधान देश रहा है।
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वह रविवार को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के समिति कक्ष में आयोजित आजादी का अमृत महोत्सव को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी ने कहा कि जब बुराई और अच्छाई में संघर्ष होता है उसकी परिणति ही अमृत महोत्सव है। इस अवसर पर चयनित 14 नव नियुक्त प्राचार्य, दो शिक्षकों एवं एक वैज्ञानिक को महासंघ की ओर से सम्मानित किया गया। इस दौरान डॉ. दीनानाथ सिंह, डॉ. ओपी चौधरी, डॉ. जगदीश सिंह दीक्षित, प्रो. प्रेमनारायण सिंह, प्रो. सुनील कुमार सिंह, डॉ. हेमेंद्र कुमार सिंह, प्रो. राजनाथ सिंह, प्रो. रामकुमार सिंह, प्रो. संतोष कुमार दूबे मौजूद रहे।
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