दीपावली के मद्देनजर लक्ष्मी—गणेश की मूर्तियों की बिक्री तेज हो गई है। इससे मूर्तिकारों में काफी उत्साह है। वहीं कोरोना काल में लोगों की सजगता पर्यावरण के प्रति पहले से बढ़ी है। ऐसे में लोग पीओपी (प्लास्टिक ऑफ पेरिस) की बजाए मिट्टी की मूर्तियों को तरजीह दे रहे हैं।
बाजारों में 50 से 500 रुपये तक की लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां मौजूद हैं। मूर्तिकारों का कहना है कि इस बार बाहरी कारीगरों के बजाए पूरा परिवार मिलकर मूर्ति बनाने में जुटा है। त्योहार करीब होने के चलते मांग के अनुसार मूर्तियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मूर्तिकारों के मुताबिक, लॉकडउन के दौरान बाजार मंदा था, लेकिन पूजा-पाठ के सामान की बिक्री थोड़ी बहुत होती ही रहती थी। लेकिन अनलॉक के बाद पहले नवरात्र और अब दिवाली के मौके पर मूर्तियों की मांग तेज हुई है। साथ ही बिक्री भी ठीकठाक हो रही है।
बाजार ठीकठाक चल रहा है। उम्मीद है कि त्योहार करीब आने के साथ इसमें और भी तेजी आएगी। खुदरा व्यापारी भी खरीदारी करने आ रहे हैं।-मृदुल मूर्तिकार एवं विक्रेता, रेवड़ी तालाब।
रेवड़ी बाजार में ग्राहकों की भीड़ को देखते हुए परिवार के सदस्यों को लगाना पड़ा है। हर कोई अपनी सामर्थ्य के अनुसार मूर्तियां खरीद रहा है। -हरिमोहन, मूर्तिकार एवं विक्रेता, रेवड़ी तालाब।
बाहर से भी आर्डर मिल रहे हैं। ग्वालिन की मूर्तियों के अलावा मिट्टी से बने भगवान गणेश व लक्ष्मी की मूर्ति के साथ रंग-बिरंगे खिलौने भी लोग खरीद रहे हैं। -चांदनी मूर्तिकार एवं विक्रेता, खोजवां।
बाजार में तीन प्रकार की गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति की मांग ज्याद है। यहां छह इंच से लेकर एक फीट तक की मूर्तियां उपलब्ध हैं। आकार के अनुरूप मूर्तियों की कीमत है। रिचा मूर्तिकार एंव विक्रेता, रेवड़ी तालाब।