वाराणसी स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के पाणिनी भवन परिसर में सोमवार को नवग्रह वाटिका का शुभारंभ हुआ। नवग्रह वाटिका से ज्योतिष और कर्मकांड के छात्रों को ग्रहों के असर व उपचार के अध्ययन में मदद मिलेगी। संस्कृति मंत्रालय के सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र की अध्यक्ष डॉ. हेमलता एस. मोहन ने केंद्र की ओर से छात्रों के लिए छात्रवृत्ति एवं अपने पिता स्व. मुरारी लाल शर्मा की स्मृति में व्याख्यान माला आरंभ करने की घोषणा की।
नवग्रह वाटिका के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए भागवत कथा वाचक आचार्य पुंडरीक शास्त्री ने वाटिका की तुलना मानस एवं भागवत में वर्णित वाटिका से करते हुए इसे भाग्य वर्धिनी वाटिका की संज्ञा दी। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ला ने कहा कि ग्रहों के प्रतिनिधि के रूप में वृक्षों की पूजा कल्याणकारी होती है। संयोजक ज्योतिष विभागाध्यक्ष प्रो. अमित कुमार शुक्ल, प्रो. शशि रानी मिश्रा, डॉ. विजय कुमार शर्मा, डॉ. मधुसूदन मिश्र, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. रामपूजन पांडेय, प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी. डॉ. शशींद्र मिश्र मौजूद रहे। संचालन डॉ. राजा पाठक ने किया।
नवग्रह वाटिका के पौधे
- चंद्रमा के लिए पलाश
- मंगल के लिए खैर
- बुध के लिए चिड़चिड़ा (लटजीरा)
- बृहस्पति के लिए पीपल
- शुक्र के लिए गूलर
- शनि के लिए शमी
- राहु के लिए दूब
- केतु के लिए कुश
- सूर्य के लिए मदार (अर्क)