कहने को तो मुंह में 32 दांत होते हैं, लेकिन चिंता की बात यह है कि इस समय 20 से 25 प्रतिशत युवाओं को 28 दांत ही हैं। जिन लोगों के पूरे 32 दांत निकल रहे हैं उनमें टेढ़े-मेढ़े होने की समस्या रहती है। हालांकि, उपचार कर इसे ठीक किया जा सकता है। बीएचयू दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय के पूर्व प्रमुख प्रो. टीपी चतुर्वेदी के युवाओं के दांतों पर किए अध्ययन में इसका पता चला।
बीएचयू दंत चिकित्सा विज्ञान संकाय की ओपीडी में मसूड़ों में सूजन, दांतों में दर्द, सड़न, टेढ़े मेढ़े दांत की समस्या लेकर मरीज आते हैं। इसमें 28 दांत वाली समस्या वाले युवा भी पहुंच रहे हैं। प्रो. चतुर्वेदी ने बताया कि यह भी देखने को मिला है कि जबड़े की साइज भी नहीं बढ़ रही है। बहुत कम लोगों को ही 32 दांत हो रहे हैं। पहले लोग चना, गन्ना, मक्का सहित कड़ी चीजों को खाते थे। गांव में तो कुछ लोग इसका पालन कर रहे हैं, लेकिन शहर में चबाकर कम खाने की वजह से जबड़ों की साइज भी छोटी हो जा रही है। इसी वजह से अकल दांत उगने की जगह नहीं बच रही है।
अकल दांत भी नदारद
ओपीडी में आने वाले मरीजों पर अध्ययन करने वाले प्रो. टीपी चतुर्वेदी ने बताया कि 150 मरीजों में 20 प्रतिशत में अकल दांत यानी विस्डम टूथ नहीं मिल रहे हैं। यह विशेषकर 17 से 25 साल वालों में ही आते हैं। 15 से 20 प्रतिशत में आते ही नहीं है। इसकी वजह सही तरीके से चबाकर नहीं खाना है।